सहारनपुर। वित्तीय वर्ष 2021-22 खत्म होने में पांच दिन शेष बचे हैं। इस वर्ष जिले में विकास की कई परियोजनाएं लगभग पूरी होने के कगार पर पहुुंच गई, लेकिन खेल की योजनाएं धरातल पर ही नहीं उतरी है। वहीं, शुद्ध जल की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सिर्फ कागजों में ही काम हुआ है। बायो व सीएनजी गैस प्लांट लगाने को सिर्फ जगह चिह्नित हुई। हकीकत यह है कि दावे जमीनी स्तर पर खोखले नजर आ रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में हुए कार्यों को लेकर प्रस्तुत है अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट ... संवाद
35 करोड़ की लागत से बने 852 सामुदायिक शौचालय, ताले भी लटके
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनपद की 884 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए जा रहे हैं। इनमें 852 सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार हो गए, जिन्हें स्वयं सहायता समूहों के हैंडओवर किया गया है। बाकी शौचालय निर्माणाधीन है। चार और पांच गांवों में अभी तक भूमि ही उपलब्ध नहीं है। वहीं, कई जगहों पर शौचालयों पर ताले लगे होने की वजह से वह प्रयोग में ही नहीं आए।
बायोगैस व सीएनजी बनाने की तैयारी, काम नहीं हुुुआ शुरू
गोबर धन योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में एक-एक प्लांट लगाकर गोबर से बायोगैस व सीएनजी बनाई जानी है। गांव चकवाली और कलसिया में जगह चिह्नित कर ली गई है, जिस पर प्लांट लगेंगे, लेकिन अभी इस योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। वहीं, विभाग के मुताबिक बजट जारी होने पर काम शुरू होगा।
बनाई गई 996 पोषण वाटिका
जिले में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिन पर पोषण वाटिकाओं का निर्माण कराया जाना है। इसके तहत बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से 96 पोषण वाटिका बनाई गई हैं। पोषण वाटिकाओं के जरिए कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को हर सब्जियां उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पोषण वाटिकाएं ग्राम पंचायत निधि से बनाई गई हैं।
उद्यमी बनने की ओर बढ़े महिलाओं के कदम, बस बन सके ग्रुप
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए प्रत्येक विकास खंड पर लघु उद्योग स्थापित करने की योजना शुरू की गई थी। महिलाओं के 20 प्रोड्यूसर ग्रुप बना दिए गए हैं। सढ़ौली कदीम में बांस, पुवांरका में हौजरी, सरसावा में पूजा अर्चना व शृंगार के सामान, बेरीगांव में खादी के कपड़े बनाने, नागल में काष्ठ कला के लिए लद्यु उद्योग बनाया जाएगा, जिसको लेकर सर्वे भी पूरा हो गया है, लेकिन कुछ ही जगहों पर कार्य हुआ है।
पॉली क्लीनिक का भवन बना, नहीं मिली मशीनें
रामपुर मनिहारान में छह करोड़ की लागत से मंडल का पहला पॉली क्लीनिक बनाया है। भवन बनकर तैयार हो गया है, लेकिन क्लीनिक में अत्याधुनिक मशीनें नहीं लग पाई हैं। पॉली क्लीनिक में मवेशियों की गंभीर बीमारी, एक्सरा, अल्ट्रासाउंड, रक्त, यूरिन और गोबर की जांच, सर्जरी और पोस्टमार्टम आदि की व्यवस्था की जानी है।
पेयजल योजना के लिए हुआ सिर्फ सर्वे
जनपद की 884 ग्राम पंचायतों में प्रत्येक घर में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए हर घर नल- हर घर जल योजना के तहत पानी की पाइप लाइन बिछाई जानी है। यह कार्य डीआरडीए और जल निगम द्वारा संयुक्त रूप से कराया जाना है, लेकिन एक वर्ष में सिर्फ सर्वे ही हो पाया है।
स्टेडियम: दस करोड़ की लागत से होना है कार्य, नहीं मिला बजट
केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना के तहत नकुड़ ब्लॉक के गांव अध्याना में स्टेडियम बनाए जाने की योजना अधर में लटकी है। दस करोड़ की लागत से इस स्टेडियम का निर्माण होना है, लेकिन आज तक बजट ही जारी नहीं हो पाया है। देवबंद के भायला में भी स्टेडियम नहीं बन पाया है। इसी तरह प्रत्येक विकासखंड स्तर पर खेल मैदान बनाए जाने का कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है।
30 करोड़ से बने सचिवालय
जनपद की ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों को ग्राम सचिवालयों के रूप में विकसित किया जा रहा हैै। एक वर्ष में करीब 290 ग्राम सचिवालय ही बनकर तैयार हुए हैं, लेकिन बाकी जगह अभी ग्राम सचिवालय नहीं बने। यह कार्य ग्राम पंचायत निधि से होना है। इस कार्य में अभी तक 30 करोड़ रुपया खर्च हुआ है।
नए तालाब नहीं बने, मनरेगा से होना था कार्य
जिले की 884 ग्राम पंचायतों में नवीन तालाब बनाए जाने थे। यह कार्य मनरेेेगा के तहत होना था, लेकिन इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में यह कार्य भी अधर में लटका हुआ है।
सभी कार्यों को पूरा कराया जा रहा है। जिले में कई जगहों पर अच्छा काम हुआ है, जो कार्य अधूरे रह गए हैं। आगामी दिनों में उन्हें भी पूरा कराया जाएगा। -विजय कुमार, मुख्य विकास अधिकारी