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आम के पेड़ों में बढ़ा शूट गॉल कीट का प्रकोप

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शूटगॉल कीट से प्रभावित पेड़ का निरीक्षण करते कृषि वैज्ञानिक : फााइल फोटो - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। आम के बागों में कई स्थान पर शूट गॉल कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। यह कीट आम के पेड़ की टहनियों के शीर्ष कलिकाओं का रस चूसकर खराब कर देता है। प्रभावित शीर्ष कलिकाओं की वृद्धि रुक जाती है। इसका प्रभाव अक्टूबर माह में पेड़ पर दिखाई देने लगता है।
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आम के पेड़ों पर कई स्थानों पर शूट गॉल कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। जिन पेड़ों पर इसका अधिक प्रकोप होता है उनमें बौर नहीं आता। जिससे उत्पादकता प्रभावित होती है। शूट गॉल कीट के शिशु कीट के अंडों से लार्वा 25 जुलाई से 15 सितंबर के बीच निकलते हैं। इसके शिशु कीट आम के पेड़ की नई शाखाओं की कलियों का रस चूसकर विषैला स्राव छोड़ते हैं। इससे प्रभावित कलियां अक्टूबर महीने से गुलाबी रंग की दिखाई देने लगती हैं। इसके स्राव के कारण शीर्ष कलिकाओं की वृद्धि रुक जाती है। जिस पेड़ पर इसका प्रकोप हो जाता है उसका दो से तीन वर्ष तक नियंत्रण करना पड़ता है। इसको कुछ बागवान आम के पेड़ का कोढ़ भी कहते हैं। इस कीट को नियंत्रण करने का सही समय जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के मध्य तक है। जिसमें शूट गॉल कीट के शिशु कीट को कीटनाशक का छिड़काव करके नियंत्रित किया जा सकता है।
ऐसे करें उपचार
केवीके के प्रभारी ने बताया कि शूट गॉल कीट पर नियंत्रण पाने के लिए कीटनाशकों के कम से कम दो छिड़काव करने होंगे। इसके लिए एक हजार लीटर पानी में दो लीटर प्रोफेनोफास और एक लीटर थायामियाक्सम को मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव करते समय स्टीकर का प्रयोग करना लाभकारी रहता है। इसका पहला छिड़काव जुलाई के अंतिम सप्ताह, दूसरा इसके दस दिन बाद अगस्त के महीने में करना चाहिए।
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शूट गॉल कीट को कई बागवान पेड़ का कोढ़ भी कहते हैं। प्रभावित पेड़ की शाखाओं पर बौर नहीं निकलता है। जिसका उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ता है। इसका उपचार जुलाई के अंतिम सप्ताह से मध्य अगस्त तक करना अधिक लाभकारी रहता है। इसके बाद कीटनाशक का छिड़काव करने से उचित परिणाम सामने नहीं आता है।
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- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र एवं प्रोफेसर फसल सुरक्षा विभाग
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