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‘मुझे भी ताबूत में बंद कर दो, मैं भी इनके साथ जाऊंगी’

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शारदा नगर में शहीद नायक निशांत शर्मा को श्रद्घांजिलि देते परिवार विलाप करते - फोटो : SAHARANPUR
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‘मुझे भी ताबूत में बंद कर दो, मैं भी इनके साथ जाऊंगी’
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सहारनपुर। देश के लिए शहीद हुए नायक निशांत शर्मा को अंतिम विदाई देते समय उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बुरी तरह बिलखते हुए पत्नी ने कहा कि मुझे भी ताबूत में बंद कर दो, मैं भी इनके साथ जाऊंगी। कुछ महिलाओं ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला।
रविवार रात जब शहीद निशांत शर्मा का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो उनकी पत्नी सोनम शर्मा तिरंगे से लिपटे ताबूत के पास घंटों बैठी रहीं। वह यही कहती रही कि मैं भी इनके साथ ही जाऊंगी। उनका हाल देखकर हर किसी की आंख नम हो गईं। वहीं, निशांत के भाई ऋषभ और शुभम भी फूट फूटकर रोते रहे।
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मेरा शेर... मेरा लाल मुझे छोड़कर जा रहा है
अंतिम विदाई के दौरान श्रृद्धांजलि देने पहुंचीं मां ममता बदहवास हालत में बोलीं- मेरा शेर...मेरा लाल, मां को छोड़कर जा रहा है। श्मशान घाट में भी ममता अपने बेटे के ताबूत की ओर घंटों देखती रहीं।
देश के लिए मर मिटना सिखाया परिवार ने
शिवपुरी श्मशान घाट में निशांत शर्मा को श्रृद्धांजलि देने के बाद भाई ऋषभ और शुभम ने कहा कि उनके परिवार ने देश के लिए मर मिटना सिखाया है। उनका भाई जांबाज था। उससे बिछड़ने से बड़ा दुख तो नहीं हो सकता। लेकिन यह हमारे और परिवार के लिए गौरव की बात है।
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बेटे को खोने का गम, मगर तिरंगे की शान सबसे ऊपर
निशांत को श्रृद्धांजलि देने के बाद पिता जोगेंद्र ने कहा कि उनके एक सपूत ने देश के लिए बलिदान दिया है तो दूसरा बेटा भी सेना और देश के लिए समर्पित है। बेटे को खोने का गम है। लेकिन देश और तिरंगे की शान सबसे ऊपर है।
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