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प्रदेश की दूसरे नंबर की सीएचसी पर चिकित्सा सुविधाओं का टोटा

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सहारनपुर/नागल। कायाकल्प के मामले में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने वाली सीएचसी नागल चिकित्सकों, चिकित्साकर्मियों और संसाधनों की कमी से जूझ रही है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जिन्हें हल्की सी तबीयत बिगड़ने पर रेफर कर दिया जाता है।
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सहारनपुर-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे के लिहाज से नागल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहुत महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके यहां संसाधन और पर्याप्त डॉक्टर नहीं है। सीएचसी में चिकित्सकों के सात पद सर्जित हैं, जिनमें से मात्र एक ही चिकित्सक यहां तैनात है, जो एमबीबीएस है। स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, बेहोशी, फिजीशियन, मेडिकल ऑफिसर आदि पद खाली हैं। स्टाफ नर्स के चार पद हैं, जिनमें से एक पद खाली चल रहा है। इसके अलावा एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को इलाज और जांच के लिए या तो जिला अस्पताल जाना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों के पास। कई बार इलाज मिलने में देरी की वजह से मरीजों को नुकसान भी उठाने पड़े हैं।
चिकित्सा सुविधा के अभाव में दम तोड़ गई जिंदगी
केस एक
रेलवे रोड नागल निवासी एक युवती को जनवरी माह में एक युवक ने चाकुओं से गोद दिया था। युवती को परिजन सीएचसी नागल लेकर पहुंचे थे। खून अधिक बहने की वजह से युवती को खून की सख्त जरूरत थी, लेकिन सीएचसी पर सुविधाएं नहीं होने की वजह से युवती ने सीएचसी में ही दम तोड़ दिया था।
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केस दो
नौ फरवरी को सरकड़ी निवासी मोनू कुमार अपनी मां के साथ घर लौट रहा था। सड़क हादसे में मां और बेटा दोनों गंभीर रूप से घायल हुए थे। दोनों को सीएचसी नागल ले जाया गया था, जहां से रेफर कर दिया गया था। रास्ते में दोनों ने दम तोड़ दिया था।
प्रतिदिन आते हैं 300 से अधिक मरीज
नागल क्षेत्र में 80 गांव आते हैं, जिनमें लाखों लोग निवास करते हैं। सीएचसी की बात करें तो यहां प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें से कइयों को विशेषज्ञ चिकित्सक और इलाज की व्यवस्था नहीं होने की वजह से जिला अस्पताल भेजा जाता है।
क्षेत्रवासियों की पीड़ा
-गांव उमाही कलां निवासी गरजाला का कहना है कि महिलाओं की कई शारीरिक समस्याएं होती हैं, जिन्हें वह पुरुष चिकित्सकों के साथ साझा नहीं कर सकती। नागल सीएचसी पर महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से महिलाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
- रविंद्र ने बताया कि सीएचसी पर मात्र एक एमबीबीएस चिकित्सक है। पूरे नागल में कोई भी अच्छा चिकित्सक नहीं है। ऐसे में जरा से गंभीर मरीजों और घायलों को जिला अस्पताल लेकर जाना पड़ता है।
- भलसवा इसापुर निवासी रश्मि राणा ने बताया कि सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से लोगों को अपने बच्चों को इलाज के लिए शहर भागना पड़ता है।
- जाकिर हुसैन का कहना है कि सामान्य बुखार का केंद्र पर इलाज है, लेकिन यदि वही बुखार गंभीर हो जाए तो उसके लिए केंद्र प्रभारी जिले पर रेफर कर देते हैं।
सीएचसी नागल में चिकित्सकों के कई पद खाली हैं, फिर भी प्रयास यही रहता है कि जो मरीज या घायल आ रहा है उसे बेहतर से बेहतर इलाज दिया जा सके। सभी तरह की जांच सुविधा भी है, लेकिन अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मशीन नहीं है।
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डॉ. विकास पाल, प्रभारी, सीएचसी नागल

जाकिर हुसैन- फोटो : SAHARANPUR

गरजाला- फोटो : SAHARANPUR

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