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शुभ मुहूर्त का रखें ध्यान, फिर करें कन्यादान

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Keep in mind the auspicious time, then do the devotion
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सहारनपुर। करीब 96 दिन तक भगवान विष्णु के शयन में रहने के बाद नौ नवंबर से आप बैंड, बाजा और बरात की तैयारी कर लीजिए। 15 नवंबर से शुभ मुहूर्त शुरू होने जा रहा है। इसमें विवाह के अलावा यज्ञोपवीत, मुंडन, अन्नप्राशन आदि मुहूर्त भी शामिल हैं पर अहम ये है कि 14 दिसंबर से 10 जनवरी तक गुरु अस्त रहेंगे। इसलिए इस बीच कोई शुभ कार्य नहीं होगा। ज्योतिषियों की मानें तो विवाह मुहूर्त की तरह ही विवाह के दौरान विवाह संस्कार और कन्यादान के मुहूर्त का जरूर ध्यान रखें। यदि इस मुहूर्त में विवाह संस्कार और कन्यादान नहीं किया गया तो विवाह के बंधन में ‘गांठ’ पड़ सकती है।
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12 जुलाई से भगवान श्री हरि विष्णु शयन के लिए चले गए थे इसलिए सभी शुभ मुहूर्त विशेषकर विवाह संस्कार वर्जित था। जो नौ नवंबर तक शुरू हो जाएगा। नौ नवंबर से देव प्रबोधनी एकादशी से श्री हरि विष्णु जाग्रत हो जाएंगे और सभी शुभ मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी। मुहूर्त की बात करें तो नवंबर माह में 19, दिसंबर में नौ, जनवरी में 14, फरवरी में 14, मार्च में तीन मुहूर्त विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन, अन्नप्राशन आदि के लिए है, जबकि 14 दिसंबर से फिर गुरु अस्त हो जाएंगे इसलिए 14 दिसंबर से दस जनवरी तक कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी और ज्योतिषाचार्य पंडित जितेन्द्र शांडिल्य ने बताया कि अहम ये है कि मुहूर्त के बावजूद विवाह संस्कार और कन्यादान के सही मुहूर्त पर ही संस्कार करें वरना सब कुछ अच्छा होते हुए भी शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार विवाह संबंधों को लेकर कहीं न कहीं दिक्कत आ सकती है।
मांगलिक दोष दूर करने को ये करना जरूरी
भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के निदेशक डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि अमूमन देखने में ये आता है कि कई बार ज्योतिष और पंडित मांगलिक दोष को दूर करने के लिए प्राय: पीपल और घड़े से विवाह करने की सलाह देते हैं, लेकिन ये कम ही लोग जानते होंगे कि ये तभी प्रभावी होता है जब कन्या के हाथों में मेंहदी लग चुकी हो अन्यथा पूर्व में किए गए ऐसे संस्कार सफल नहीं होते हैं।
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--विवाह से पहले इन बातों पर जरूर करें गौर
-मांगलिक कन्या का विवाह मांगलिक पुरुष के साथ ही होना चाहिए
-गुण चाहे कम मिलें, लेकिन कुंडली जरूर मिलनी चाहिए
-किसी से भी नहीं विद्वान ज्योतिष से कुंडली का मिलान करवाएं
-एक गोत्र में विवाह कदापि नहीं करें
-ब्राह्मणों में नाड़ी दोष सबसे बड़ा दोष होता है, इसका जरूर रखें ख्याल
-यदि कुंडली मिलान नहीं हो तो विवाह नहीं करें
-यदि वर्ग दोष, भकूट दोष, वश्य दोष आदि हो तो विवाह से परहेज करें
-विवाह संस्कार जो विवाह का मुहूर्त और कन्यादान का है उसे हर हाल में करें
-कन्या को अपने पैतृक घर से विदाई देना बेहद शुभ होता है
-विवाह कुंडली मिलान, मुहूर्त का हर प्रकार से ध्यान रखा जाए तो निश्चित विवाह सुखद होगा
-यदि कुंडली भी मिल रही हो, विवाह मुहूर्त भी अच्छा मिल रहा हो, लेकिन वर में शराब पीने का दोष या निकम्मा होने का गुण दिखे तो कदापि शादी नहीं करनी चाहिए।
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