देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति ने देश की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है। इसमें समिति ने लोकतांत्रिक मूल्यों, सांविधानिक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में दिल्ली स्थित मुख्यालय पर आयोजित बैठक में विचार-विमर्श के बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें कहा गया कि देश में बढ़ते घृणास्पद भाषण, धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक तनाव चिंता का विषय हैं। समिति ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक पहचान, संस्थानों, मस्जिदों, मदरसों और कब्रिस्तानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे असुरक्षा का माहौल पैदा हो रहा है। समिति ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और नागरिकता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन विषयों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही युवाओं में बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूल मुद्दों पर अधिक ध्यान दिए जाने की जरूरत बताई गई।
जमीयत की ओर से सभी राजनीतिक दलों, संसद सदस्यों, न्यायपालिका, मीडिया, बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज से संविधान के मूल सिद्धांतों, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं करता, बल्कि न्याय, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था के दायरे में रहकर अपने सांविधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
एक अन्य प्रस्ताव में कार्यकारी समिति ने देश के विभिन्न राज्यों में अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के नाम पर चल रही गतिविधियों पर चिंता जताई। मांग करते हुए कहा कि अवैध घुसपैठ से संबंधित सभी कार्रवाइयां पारदर्शी, न्यायसंगत और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हों तथा किसी भी प्रकार की प्रोफाइलिंग, भेदभाव और सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाए।