सहारनपुर। एलोपैथिक दवाएं और इंसुलिन मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन उसे क्योर नहीं कर सकते हैं। इसलिए जीवन शैली में बदलाव, योग और मेडिटेशन करके मधुमेह से शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से जंग जीती जा सकती है। यही कारण है कि अब लोग योग, मेडिटेशन और आयुर्वेद की ओर तेजी से आ रहे हैं।
दवा और इंसुलिन इंसान की जान बचा कर डायबिटीज के खतरों को टाल सकता है, लेकिन यह डायबिटीज का इलाज नहीं है। डायबिटीज का असली इलाज खुद को भय तनाव और चिंता से दूर रखना और आराम तलबी से दूर रहकर मेहनत कश बनना ही है। बढ़ती आराम तलबी स्वाद की कमजोरी के कारण बढ़ता फास्ट फूड का प्रचलन, चिंता और तनाव ने बड़ों के साथ-साथ अब बच्चों को भी डायबिटीज की चपेट में ले लिया है। इसका एकमात्र इलाज जीवनशैली में बदलाव लाना नियमित ध्यान का अभ्यास, प्रतिदिन पसीना लाने वाला शारीरिक श्रम और कुछ समय शांत मन से प्रकृति में सैर करना है। योग में पद्मभूषण से सम्मानित भारत भूषण ने बताया कि मेडिटेशन से होने वाली तनाव मुक्ति हमारी अंत: स्रावी ग्रंथियों को सहज स्थिति में लाकर उनके रस स्त्राव को स्वाभाविक बनाने में कारगर सिद्ध हुई हैं।
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मेडिटेशन के साथ ये योग करें तो मिलेगा लाभ
योगाभ्यास में मेडिटेशन के साथ-साथ उड्डियान बंध, अग्निसार क्रिया व भारत योग की विरेचन क्रिया के अलावा मृणाल आसन, कोणासन, मत्स्येंद्रासन, मयूर आसन, पश्चिमोत्तानासन, कुर्मासन, व मंडूकासन मधुमेह को नियंत्रित रहने व पैंक्रियाज को फिर से इंसुलिन बनाने के लिए सक्रिय करने की सामर्थ्य रखते हैं। नियमित योगाभ्यास से डायबिटीज से होने वाले कई दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
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गैजेट्स की दुनिया कर रहा है बीमार
इंसान शारीरिक मेहनत से काम न करने और गैजेट्स व टूल्स का सहारा लेने में अपनी समझदारी मानता है और उसे बच्चों को भी शारीरिक मेहनत से दूर रखने की आदत पड़ गई है जो डायबिटीज और मोटापे की खास वजह होने के साथ-साथ अनेक बीमारियों की जड़ भी है। हमें सुविधाओं को स्टेटस सिंबल न बनाकर पैदल चलने साइकिल चलाने और यथासंभव व्यायाम करने की आदत डालनी होगी इससे रोगों से भी बचे रहेंगे प्रदूषण में भी कमी होगी खर्चों में कमी आएगी और शरीर का स्वास्थ्य और सौंदर्य भी मिलेगा।