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महंगाई ने बढाई काष्ठ हस्तशिल्प उद्यमियों में बेचैनी

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काष्ठ हस्त शिल्प तैयार बेड एक हिस्सा - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद काष्ठ हस्तशिल्प में इस्तेमाल होने वाला सामान महंगा हो गया है। कच्चे माल के भाव में इजाफा होने का असर इसकी उत्पादन लागत पर पड़ने लगा है। कच्चा माल महंगा होने से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों की लागत में करीब 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। इसके अलावा समुद्री किराया बढ़ने से अमेरिका और यूरोप तक माल की पहुंच भी महंगी हो गई है। इसका असर भी इस उद्योग पर पड़ रहा है।
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जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प में वुड कार्विंग उत्पादों की धूूम देश ही नहीं दुनिया के कई देशों में है। इसके चलते यहां से प्रतिवर्ष करीब एक हजार करोड़ रुपये का निर्यात भी वुड कार्विंग उत्पादों का होता है। यहां पर काष्ठ हस्तशिल्प बनाने की 550 से अधिक इकाईयां हैं। इस उद्योग से करीब डेढ़ लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं। काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का वार्षिक कारोबार करीब 1400 से 1500 करोड़ रुपये से भी अधिक का है। जबकि निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये का होता है।
कच्चा माल महंगा होने से बढ़ी लागत
कच्चे माल का भाव बढ़ने से उद्यमियों में बेचैनी बढ़ गई है। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड सर्विसेज के अध्यक्ष और निर्यातक रविन्द्र मिगलानी ने बताया कि काष्ठ हस्तशिल्प को चिपकाने के काम आने वाले रसायन के रेट में 33 प्रतिशत, पैकिंग पेपर में 60 प्रतिशत, टेप के भाव में 44 फीसदी, एमडीएफ के भाव में 26 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा स्टील एवं प्लास्टिक सहित अन्य कई के रेट भी बढ़ हैं।
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दुनिया भर में पसंद किया जाता है काष्ठ हस्तशिल्प
जिले से वुड कार्विंग का निर्यात विश्व के कई देशों में होता है। इनमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, रूस और यूक्रेन आदि शामिल हैं।
25 फीसदी से अधिक बढी उत्पादन लागत
काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों को तैयार करने में काम आने वाले कच्चे माल के भाव में बढ़ोत्तरी होने से इसकी उत्पादन में 25 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हो गया है। इसका असर काष्ठ हस्तशिल्प उद्योग पर पड़ रहा है। सरकार को कच्चे माल के बढते रेट पर अंकुश लगाना चाहिए। - रविन्द्र मिगलानी, निर्यातक।
बढ़ गया समुद्री किराया
युक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से कंपनियों ने समुद्री किराए में बढ़ोत्तरी कर दी है। परिवहन का रेट बढ़ने से अमेरिका और यूरोप के कई देशों तक माल पहुंचना भी महंगा हो गया है। कई शिपिंग कंपनियों ने किराए में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी कर दी है। जिसका असर इस उद्योग पर पड़ रहा है। - सोम गोयल, निर्यातक।
असमंजस में उद्यमी
युक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने से उद्यमी असमंजस में है। कच्चे माल की महंगाई ने भी टेंशन पैदा कर दी है। युद्घ ने उद्यमियों के असमंजस को बढा दिया है। इस समय उद्यमी तय नहीं कर पा रहे हैं कि नया माल बनाएं या नहीं। क्योंकि काष्ठ हस्तशिल्प आवश्यक वस्तुओं में नहीं आता। बाजार में इसकी मांग तक होती है जब सुख शांति हो। - असद खान, निर्यातक।

काष्ठ हस्त शिल्प- फोटो : SAHARANPUR

वुडकार्विंग निर्यातक रविंद्र मिगलानी- फोटो : SAHARANPUR

वुडकार्विंग निर्यातक असद खान- फोटो : SAHARANPUR

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