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सियासत: सपा का दामन थाम इमरान मसूद बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण, राजनीति ने की जुड़वां भाइयों की राहें अलग

Tue, 11 Jan 2022 05:13 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

इमरान कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिव थे, सपा का दामन थामने के बाद पश्चिमी यूपी में सियासी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इमरान सपा में शामिल होकर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। वहीं इमरान का कहना है कि उनकी सीट का फैसला हाईकमान करेगा। 
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इमरान मसूद व नोमान मसूद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहारनपुर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सपा में जाने के निर्णय के बाद इमरान ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार ही जिले की  सातों विधानसभा सीट पर प्रत्याशी उतारे जाएंगे। 

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यह पूछे जाने पर कि वह किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान का फैसला उनके लिए सर्वोपरि होगा। उन्होंने कहा कि सपा किसानों, नौजवानों, बेरोजगारों, व्यापारियों और उद्यमियों सहित सबके बारे में सोचती है।

आठ साल बाद हुई सपा में फिर वापसी
इमरान मसूद ने आठ साल बाद सपा में वापसी की है। इमरान वर्ष 2007 में मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ विधायक बने थे। उन्होंने जगदीश राणा को हराया था। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर नकुड़ विधानसभा से चुनाव लड़े थे, मगर बसपा के डॉक्टर धर्म सिंह सैनी से चुनाव हार गए थे। 
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वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव सहारनपुर सीट पर सपा से लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के राघव लखनपाल से हार गए थे। इसके बाद 2017 में उन्होंने नकुड विधानसभा से फिर चुनाव लड़ा, मगर इस बार भी भाजपा के डॉक्टर धर्म सिंह सैनी  से पराजित हुए थे। आठ साल बाद इमरान मसूद ने फिर से सपा में वापसी की है। 

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राजनीति ने की जुड़वां भाइयों की राहें अलग
राजनीति ने काजी परिवार के जुड़वां भाइयों इमरान मसूद और नोमान मसूद की राजनीतिक राहें अलग कर दीं। एक ही दिन जहां इमरान मसूद ने कांग्रेस छोड़ कर सपा में जाने की घोषणा की वहीं नोमान मसूद बसपा में शामिल हो गए। दोनों भाइयों की अलग राजनीतिक राहें विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बनाएंगी।

इमरान मसूद जिले के कद्दावर नेता हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इमरान के सपा में शामिल होने से विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बनेंगे। सपा जिलाध्यक्ष चौधरी रुद्रसेन का भी कहना है कि इससे पार्टी को लाभ होगा।

इमरान मसूद के जुड़वा भाई नोमान मसूद ने भी सोमवार को गाजियाबाद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमशुद्दीन राईन की मौजूदगी में बसपा ज्वाइन कर ली। तीन माह पहले ही नोमान ने दिल्ली में चौधरी जयंत सिंह के निवास पर राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण की थी। दोनों भाइयों के अलग-अलग पार्टियों में जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। 

नोमान मसूद भी कांग्रेसी रहे हैं। गंगोह के पूर्व चेयरमैन नोमान ने कांग्रेस के टिकट पर 2017 में गंगोह विधानसभा का चुनाव लड़ा था। यहां से विधायक बने भाजपा के प्रदीप चौधरी के 2019 के लोकसभा चुनाव में एमपी बनने पर इसी साल गंगोह सीट पर उप चुनाव हुआ। कांग्रेस ने उप चुनाव में भी नोमान को यहां से चुनाव लड़ाया था, हालांकि वो दोनों बार हार गए। कुछ माह पहले वो कांग्रेस छोड़ कर रालोद में शामिल हुए थे। 

सोमवार को वो बसपा में चले गए। माना जा रहा है कि इस बार वो गंगोह सीट पर ही बसपा से चुनाव लड़ेंगे। इमरान का कहना है कि उनका टारगेट अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनवाना है। भाई के बसपा में जाने पर उन्होंने कहा, मेरे समर्थक ही मेरा राजनीतिक परिवार हैं, यदि कोई साथ नहीं चलना चाहता वह उसकी मर्जी है।

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विधायक मसूद अख्तर भी जा सकते हैं सपा में
सहारनपुर देहात सीट से कांग्रेस के विधायक मसूद अख्तर भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी उन्होंने इसकी घोषणा  नहीं की है, लेकिन उनका कहना है कि वह इमरान मसूद के साथ हैं। माना जा रहा है  कि इमरान मसूद जल्द ही विधायक मसूद अख्तर के साथ लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समक्ष पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर सकते हैं। 

भाजपा के डर से इमरान ने बदल लिया दल : शशी वालिया 
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव रहे इमरान मसूद के सपा में जाने की घोषणा के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व जिलाध्यक्ष शशी वालिया ने कहा कि भाजपा सरकारों की गलत नीतियों का विरोध कांग्रेस सड़क से संसद तक कर रही है, जो लोग भाजपा से डरे हुए हैं, वह कांग्रेस छोड़ रहे हैं। अपनी महत्वाकांक्षा के चलते इमरान मसूद ने कांग्रेस छोड़ी है। इससे पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

जिलाध्यक्ष चौधरी मुजफ्फर अली का कहना है कि उनके नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी पहले ही कह चुके हैं कि जो भाजपा से डरते हैं, वह पार्टी छोड़ने के लिए आजाद हैं। कांग्रेस एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि विचारधारा है।

ऐसे लोग जनता की सेवा क्या करेंगे, जो सगे भाई होने के बाद भी राजनीतिक लाभ के लिए अलग-अलग दल में एक ही दिन में शामिल हो रहे हैं। अपने लाभ के लिए इमरान मसूद सपा में गए हैं। इनके भाई नोमान मसूद बसपा में गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव में सभी सातों सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। इमरान के जाने से संगठन को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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