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Saharanpur: यहां का कबूतर बाजार भी है खास मशहूर, प्रशिक्षित कबूतर खाते हैं ड्राई फ्रूट्स और देसी घी के परांठे

Tue, 06 May 2025 01:57 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर

सार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद की वुड कार्विंग देश दुनिया तक मशहूर है। यहां कपड़ा मार्केट की भी विशेष पहचान है लेकिन यहां एक और चीज है जो उसे खास मशहूर बनाती है और वह है यहां का कबूतर बाजार।
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सहारनपुर के रेंच के पुल पर बिक्री के लिए रखे  कबूतर - फोटो : mathura
सहारनपुर जनपद वुड कार्विंग और कपड़ा मार्केट के अलावा सहारनपुर की एक और विशेष पहचान है, जिसे शायद कम ही लोग जानते हैं। यहां के कबूतर बाजार की अपनी अलग छाप है। अगर आपको भी पढ़े-लिखे यानी प्रशिक्षण ले चुके कबूतर चाहिए तो आसानी से मिल सकते हैं। खास बात यह है कि यहां पर कबूतर की एक दो प्रजाति नहीं, बल्कि अनगिनत प्रजाति है।
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दरअसल, शहर में कम्बोह का पुल, मंडी समिति रोड, खानआलमपुरा, ढोलीखाल, बेहट रोड सहित काफी स्थानों पर लोग कबूतर पालते हैं। यहां कबूतरों को अधिक घंटे तक उड़ाने के लिए सुबह और शाम प्रशिक्षण भी दिया जाता है। थकान से बचाने के लिए कबूतरों को बादाम, देसी घी के पराठे, काजू और गेहूं भी खिलाए जाते हैं।

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रेंच के पुल पर कबूतरों की मार्केट लगती है। यहां से देहरादून, दिल्ली और हरियाणा समेत कई अन्य राज्यों में कबूतर भेजे जाते हैं। सबसे ज्यादा मांग पंजाबी, कलदमा, मुखी, जाग, ललसरा, कागदी पत्ता आदि कबूतरों की है। इनकी कीमत 150 रुपये से शुरू हो जाती है, जो पांच हजार रुपये तक है। यहां अलग प्रजाति के कबूतर भी हैं, जिसकी खासियत यह है कि उसके पैरों में पंख है और वह घरों में रहता है। वह बाहर नहीं उड़ता है।
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इस तरह देते हैं प्रशिक्षण
कबूतरों का प्रशिक्षण देने वाले राशिद का कहना है कि प्रशिक्षण मचान में शुरू होता है। एक बार जब घरेलू कबूतर खरीद लिए जाते हैं, तो उन्हें उड़ान भरने से पहले करीब दो सप्ताह तक बंद मकान में रखा जाता है। इसके बाद मचान पर बैठाकर उन्हें घंटों तक उड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें समय पर खाना-पीना दिया जाता है। उनकी इतनी सेवा की जाती है, जिससे वह भले ही आसमान में उड़े, लेकिन लौटकर अपनी मचान पर ही आना है। चार से पांच सप्ताह तक प्रशिक्षित हो जाता है।
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