धरातल पर उतरे योजना तो मिले शुद्ध जल
सहारनपुर। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाए जाने की योजना डेढ़ साल बाद भी परवान नहीं चढ़ पाई है। हर घर नल, हर घर जल योजना के तहत सिर्फ सर्वे हो पाया है। अभी तक योजना सिर्फ कागजों में ही चली है। इस योजना के तहत जनपद के 11 विकास खंडों की 884 ग्राम पंचायतों में पाइप लाइन बिछाकर घर-घर शुद्ध जल पहुंचाया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लोगों को शुद्ध जल नहीं मिल रहा है। कई गांवों में पुराने ओवरहेड टैंक बने हैं, मगर ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा है। ग्रामीण हैंडपंपों के पानी पर ही निर्भर हैं। इस पर प्रस्तुत है अमर उजाला की रिपोर्ट....
पांच साल में भी नहीं बन सका ओवरहेड टैंक
साढौली कदीम विकास खंड के गांव हबीबपुर तपोवन ऊर्फ खुवासपुर सहित पांच गांवों की छह हजार आबादी के लोग ओवरहेड टैंक के अभाव में शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं। यहां करीब 40 वर्ष पूर्व जल निगम द्वारा पानी का टैंक बनाया गया था। उस समय उस टैंक में पेयजल की आपूर्ति जल के स्रोत कुएं से होती थी। इस गांव सहित गांव रामपुर, बड़कला, हिंदूवाला, इंद्रपुर तालडा आदि को भी जलापूर्ति होती थी, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ ही यह टैंक नाकाफी साबित हो गया। इस पर बाद में वर्ष 2007 में जल निगम ने नलकूप तो लगा दिया, लेकिन ओवरहेड टैंक नहीं बन सका। पाइप लाइन भी जर्जर होने से पानी सप्लाई बाधित है। हबीबपुर तपोवन निवासी चौधरी बंदा का कहना है कि वह सभी जगह गुहार लगा कर थक चुके हैं, लेकिन ओवरहेड टैंक नहीं बन सका।
प्यास बुझाने में नाकाम चार दशक पुरानी योजना
छुटमलपुर ग्राम समूह पेयजल योजना से छुटमलपुर, गंदेवड़ा, कमेशपुर, नानका, गंगाली, निवादा, फतेहपुर, गुडंब, भैंसराऊ सहित 11 गांवों को पेयजल आपूर्ति के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन गंगाली, भैंसराऊ, बड़कला में तो कई साल से एक घर में भी शुद्ध पानी नहीं पहुंच पाया है। गांव कमेशपुर, गंदेवड़ा, नानका में गिने चुने घरों तक ही पानी पहुंच सका है। यहां तक कि छुटमलपुर के लोगों की प्यास बुझाने में योजना नाकाम साबित हुई। पेयजल योजना चार दशक पुरानी है। नलकूप तो नए लगा दिए गए, लेकिन पाइप लाइन पुरानी है, जो जगह-जगह पर टूटी पड़ी है। गांव गंगाली निवासी सन्नी राणा ने बताया कि उनके गांव में पिछले सात साल से पानी की सप्लाई बंद पड़ी है। कई बार जल निगम के अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
तीन से चार दिन में आता है पानी
ब्लाक मुजफ्फराबाद के गांव जसमौर निवासी पंडित संजय ने बताया कि जल निगम द्वारा संचालित पेयजल योजना से पिछले कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। कभी-कभी पानी आता भी है तो मुश्किल से एक बाल्टी ही भर पाती है।
करोड़ों की लागत से बनी टंकी, नहीं मिल रहा पानी
नागल क्षेत्र के गांव कोटा निवासी अनुज उर्फ छोटन का कहना है कि गांव में करोड़ों रुपये की लागत से पानी की टंकी बनी है। लेकिन ग्रामीणों को शुद्घ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जो कनेक्शन हुए थे, उनके पाइप अवरुद्ध पड़े हैं।
पीना पड़ रहा दूषित पानी
रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव मल्हीपुर निवासी अजीम का कहना है, उनके गांव का सरकारी नल बहुत दिनों से गंदा पानी दे रहा है। इसे पीकर चर्म रोग की समस्या हो रही है। गांव में कोई टंकी भी नहीं है। ग्रामीण लंबे समय से स्वच्छ पेयजल के लिए गांव में टंकी निर्माण की मांग कर रहे हैं।
किए जाते रहे ये दावे
जल निगम की ओर से 44 पेयजल योजनाओं में 71 ओवरहेड टैंक व 51 नलकूपों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति के दावे किए जाते रहे हैं। इसके अलावा जल निगम 31 ग्राम समूह एवं नौ एकल ग्राम योजनाएं संचालित होने का दावा करता है। अब जल्द ही हर घर नल-हर घर जल योजना तहत घर-घर शुद्ध पानी पहुंचाने का भी दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए अनेक योजनाएं संचालित हैं। शासन-प्रशासन का उद्देश्य घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इसको लेकर कार्य भी चल रहा है। जल्द ही जनपद के प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचेगा।
- प्रवीण, अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण
अजीम- फोटो : SAHARANPUR
छुटमलपुर पेयजल योजना का ओवरहैड टैंक- फोटो : SAHARANPUR
हबीबपुर तपोवन में जल निगम का पुराना जर्जर ओवरहैड टैंक- फोटो : SAHARANPUR
संजय प्रपन्नाचार्य- फोटो : SAHARANPUR
सन्नी राणा- फोटो : SAHARANPUR