सहारनपुर। आज विश्व धरोहर दिवस है। जनपद ऐतिहासिक दृष्टि के साथ ही भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों को बचाने की बात करें। इतना ही नहीं, संबंधित विभाग और प्रशासन मिलकर यदि इस विरासत को बचाएं तो इससे न केवल प्रशासन की आमदनी का जरिया बढ़ेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपने जनपद का महत्व पता चल सकेगा और उनका ज्ञानवर्धन होगा।
गंगा-जमुनी दोआब के बीच बसे सहारनपुर में अनेक काल अपना कुछ न कुछ अंश छोड़ गए हैं। वेदों में उल्लेख के अनुसार यह क्षेत्र ब्रह्मऋषि के नाम से जाना जाता था। यहां खुजनावर में कुषाण काल यानी करीब 2000 साल पुराना टीला है, जिसके गर्भ में अनेक ऐतिहासिक राज छिपे होने की संभावना है। इसी तरह शहर में बाबा लालदास रोड पर फुलवारी आश्रम है, जहां पर तीन दिन शहीद-ए-आजम भगत सिंह भी छिपे रहे थे और अंग्रेज शासक भी उनको यहां आकर ढूंढ नहीं पाए थे। गंगोह रोड पर ऐतिहासिक म्हाड़ी स्थल है, जहां हर वर्ष मेला भरता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं। पुराना लोहा बाजार में शहीद स्मारक है। यहां पेेड़ लगा है, जिस पर अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को फांसी भी दी है। इसी तरह जनपद में अनेक ऐतिहासिक स्थान हैं, जो अनदेखी का शिकार हैं।
शोधार्थी राजीव उपाध्याय यायावर ने बताया कि एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने जनपद में अनेक स्थलों को चिह्नित किया हुआ है, लेकिन बचाने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुरातत्व विभाग को वह अनेक पत्र लिख चुके हैं, जिसके बाद शाहजहां की शिकारगाह और हुलास में मौजूद सिंधु कालीन सभ्यता का संरक्षण किया गया है। मगर अब भी ज्यादातर साइट अनदेखी की वजह से लगातार खत्म होती जा रही हैं।
जिले के प्रमुख स्थल
- बादशाही बाग में हथनीकुंड बैराज के पास शाहजहां की शिकारगाह, एएसआई की लिस्ट में होने के बावजूद उपेक्षित
- नानौता के गांव मनोहरा के पास सिंधुकालीन सभ्यता का हुलास स्थल, जिस पर कब्जे हैं।
- खुजनावर का कुषाण कालीन टीला, जो करीब 2000 साल पुराना बताया जाता है। सरसवा का सिंधु कालीन टीला।
प्राकृतिक धरोहर, जिन्हें विकसित किया जा सकता है
- मां शाकंभरी देवी मंदिर को मां वैष्णोदेवी मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है।
- मोहंड, बादशाहीबाग और सहंस्रा ठाकुर में मौसमी झरने, जो पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जा सकते हैं।
- हथिनीकुंड बैराज के पास यमुना का सहारनपुर का हिस्सा, जहां नौका विहार हो सकता है।
महाभारत और मुगलकालीन धरोहर
- नकुलेश्वर महादेव मंदिर नकुड़।
- देवीकुंड मंदिर देवबंद
-बरसी का महादेव मंदिर तीतरो
- धनराज सरोवर खुजनावर
- पांडवों का तालाब सौराना
- वनखंडी महादेव मंदिर सरसावा
- पांच पांडव तालाब रणखंडी देवबंद।
- लखनौती का किला।
- रोहिला वंश के किला में बनी जिला जेल
जिल की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने को कार्य चल रहा है। इसको लेकर पुरातत्व विभाग भी कार्य कर रहा है। हमारा उद्ददेश्य है कि इन धरोहरों को विरासत के रूप में संजोएं रखें। -अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी
फुलवारी आश्रम स्थित वह भुरजी, जिसमें रूके थे शहीद-ए-आजम भगत सिंह- फोटो : SAHARANPUR
बाबा लाल दास रोड स्थित फुलवारी आश्रम- फोटो : SAHARANPUR
पुराना लोहा बाजार में शहीद स्मारक। यहां पर दी जाती थी क्रांतिकारियों को फांसी- फोटो : SAHARANPUR