देवबंद। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा याचिका दायर की गई थी, जिस पर शुक्रवार को जमीयत के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड फुजैल अहमद अयूबी उत्तराखंड उच्च न्यायालय की विशेष पीठ के समक्ष पेश हुए।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ में शामिल मुख्य न्यायाधीश जी.नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सूची तीसरी प्रविष्टि पांच के तहत किसी भी प्रांतीय सरकार को समान नागरिक संहिता बनाने और लागू करने का कोई अधिकार नहीं है। यहां तक कि अनुच्छेद-44 भी किसी प्रांतीय सरकार को ऐसा कानून बनाने की अनुमति नहीं देता है।
कपिल सिब्बल ने कहा कि जो कानून लाया गया है वह स्पष्ट रूप से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। सिब्बल ने अदालत से यूसीसी पर स्टे लगाने का अनुरोध किया। उत्तराखंड सरकार के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए जवाब दाखिल करने का समय मांगा। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कपिल सिब्बल के आग्रह पर अगली सुनवाई एक अप्रैल 2025 तय हुई है। बता दें, कि उत्तराखंड सरकार ने 27 जनवरी 2025 को इसे पीएम मोदी की मौजूदगी में औपचारिक रूप से लागू किया था। जिसके बाद जमीयत ने इसे उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है।