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हरियाणा-यूपी का सीमा विवाद किसानों के लिए नासूर बना

Sun, 04 Dec 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनौती
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हरियाणा - यूपी का सीमा विवाद किसानों के लिए नासूर बन गया है। प्रत्येक वर्ष यमुना का पानी कम होने के साथ ही किसानों केेे बीच नदी द्वारा छोड़ी गई जमीनों पर विवाद शुरू हो जाता है। इसके चलते कई बार संघर्ष हो चुका है, इसमें कई किसानों की जान जाने के साथ ही सैकड़ों मुकदमें यूपी और हरियाणा के न्यायालयों में लंबित हैं। इसके समाधान के लिए 1974 में दीक्षित एवार्ड गठित किया, परंतु आज भी समस्या जस की तस है। 
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तहसील नकुड क्षेत्र के गांव बेगी नाजर, बेगी रुस्तम, मानपुर, दौलतपुर, हलवाना, नाई मजरा, बल्ला मजरा, कुंडा कलां, खुर्द आदि ऐसे गांवों हैं जो यमुना नदी के किनारे बसे हैं और यहां के किसान यमुना केे आसपास की जमीनों पर खेती करते हैं। बरसात में यमुना चढ़ने पर किसानों के खेतों की सीमाएं पानी में बह जाती हैं।

बाद में इन खेतों को लेकर किसानों के बीच प्राय: विवाद हो जाता है, यही नहीं जब यमुना अपना रुख बदलती है तो इन जमीनों पर अपना हक जताने के लिए हरियाणा और यूपी के किसानों में संघर्ष हो जाता है। इसमें पिछले एक दशक में कई किसानों की मौत हो चुकी है।
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बेगी नाजर निवासी इलियास, नाजर, अब्दुल सगीर, मानपुर निवासी लेख चंद, निशान सिंह, राजेंद्र, मकसूद आदि ने उपजिलाधिकारी के यहां प्रार्थना पत्र देकर हरियाणा के किसानों पर हथियारों के बल पर उनकी जमीन हथियाने का आरोप लगाया है।

इसके लिए किसान प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन इन विवादों का हल होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकड में शनिवार को ऐसे ही एक विवाद को लेकर एक पक्ष के जफरुद्दीन, जमील, इनाम, रिजवान और दूसरे पक्ष के गुलफाम एवं सक्कड़ घायल हो गए। 
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