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एचटी बिजली लाइन के करंट से गुलदार की मौत

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गुलदार की मौत के बाद मौके का निरीक्षण करती डीएफओ श्वेता सेन - फोटो : SAHARANPUR
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। शिवालिक वन प्रभाग की मोहंड रेंज के अंतर्गत आने वाले गांव मुसैल के जंगल में बीती रात किसी समय करंट से तीन साल के गुलदार की मौत हो गई। सुबह खेतों की तरफ गए किसानों ने मृत गुलदार को देख वनकर्मियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद डीएफओ शिवालिक और वन क्षेत्राधिकारी मोहंड टीम सहित मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच पड़ताल की। गुलदार के शव को रेंज कार्यालय लाकर चिकित्सकों के पैनल से उसका पोस्टमार्टम करा अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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सोमवार की सुबह नौ बजे खेत की तरफ गए किसानों ने बेहड़ा कलां से मुसैल जाने वाले रास्ते पर स्थित मुसैल निवासी मिट्ठू राणा के खेत में एक गुलदार को मृत पड़ा देखा। इस पर ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। आनन-फानन में मौके पर डीएफओ शिवालिक श्वेता सेन, वन क्षेत्राधिकारी मोहंड एमके बलोदी, डिप्टी रेंजर राहुल त्यागी स्टाफ के साथ पहुंचे। वनकर्मियों के अनुसार माना जा रहा है कि पेड़ से छलांग लगाते वक्त तार से टकरा कर करंट लगने से उसकी मौत हुई है। पास ही तार भी टूटा हुआ पड़ा था। तार के नीचे की जमीन की घास भी जली हुई थी। इसके बाद वनकर्मी गुलदार के शव को अपने साथ मोहंड रेंज स्थित कार्यालय ले गए। जहां गेस्ट हाउस परिसर में तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने गुलदार के शव का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद उसके शव का अफसरों की देखरेख में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार गिल ने बताया कि गुलदार की उम्र करीब तीन साल रही होगी। वह मादा थी। उसके पैर और कान के पास तार के छूने से जलने के निशान पाए गए हैं। गुलदार की मौत करंट की वजह से हुई है। उनका कहना है कि संभवत: गुलदार किसी शिकार को देख कर कूदा होगा और तार की चपेट में आ गया।
गुलदार के करंट से मरने की सूचना पर वे मौके पर पहुंची थी। गुलदार के शव का चिकित्सकों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया है। उसके बाद शव का दाह संस्कार कर दिया गया।
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श्वेता सेन
डीएफओ शिवालिक वन प्रभाग
एक साल में हुई दूसरे गुलदार की मौत
छुटमलपुर। पानी, शिकार और चारे की तलाश में जंगल से भटक कर आबादी क्षेत्र में आ रहे जंगली जानवर लगातार अपनी जान गवां रहे हैं। एक साल के अंदर छुटमलपुर क्षेत्र में दूसरे गुलदार की मौत हुई है। गत वर्ष फरवरी माह में ग्रामीणों ने गुलदार के शावक को पीट पीट कर मार डाला था।
गत दो मार्च को नानौता क्षेत्र के गांव बकडौली कमालपुर में आबादी क्षेत्र में आई मादा हिरण को कुत्तों ने हमला कर जख्मी कर दिया था। इसी साल छह फरवरी को मोहंड रेंज की लालोरो में नीचे लटकी हाईटेंशन लाइन की जद में आकर हाथी की मौत हो गई थी। 12 जनवरी को जंगल से भटक कर कुत्तों द्वारा पीछा करने पर एक हिरण बड़गांव में आ घुसा था। गत वर्ष दिसंबर माह में छुटमलपुर क्षेत्र के गांव बड़कलां, जयसिंघा और गंगाली के जंगल में गुलदार दिखाई देने के बाद वन विभाग ने एक माह तक पिंजरा लगा रखा था। गत वर्ष 17 जून को आबादी में घुसे हिरण का कुछ लोगों ने शिकार कर लिया था। इसमें शिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। पिछले साल फरवरी माह में फतेहपुर थाना क्षेत्र के ही गांव गांव बुड्ढाखेड़ा पुंडीर के खेतों में मादा गुलदार अपने दो शावकों के साथ उतर आई थी। इनमें से एक शावक को ग्रामीणों ने लाठी डंडों से पीट कर मार डाला था। एक सप्ताह की कड़ी मशक्कत के बाद वन कर्मियों की टीम ने दूसरे शावक और हिंसक हुई मादा गुलदार को किसी तरह पिंजरे में बंद किया था। इनमें शावक को बादशाहीबाग के जंगल और मादा गुलदार को लायन सफरी इटावा भेजा गया था।
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