सरसावा (सहारनपुर)। कोरोना संक्रमण काल में राजकीय मेडिकल कॉलेज को नियामक संस्था राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् (नेशनल मेडिकल काउंसिल) ने एमबीबीएस की 100 सीटों की अनुमति दे दी। इसे मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने मेडिकल एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्र छात्राओं के भविष्य के लिए अच्छा कदम बताया।
अंबाला रोड स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने बताया सामान्य तौर पर राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् की टीम मेडिकल कॉलेजों में जाकर संसाधन शिक्षकों की उपलब्धता छात्रावास शैक्षणिक कक्ष प्रयोगशाला आदि बिंदुओं का निरीक्षण करती है। निरीक्षण के दौरान सभी प्रपत्र जांचने के बाद ही मेडिकल कॉलेजों को सीटों का आवंटन किया जाता है, परंतु इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् ने मेडिकल कॉलेज से बिंदुवार संपूर्ण जानकारी से जुड़ा पत्र भेजकर शपथ पत्र मांगा।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संपूर्ण जानकारी शपथ पत्र पर उल्लेखित करते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् को भेज दी। प्रपत्रों से संतुष्ट होने के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् (एनएमसी) ने राजकीय मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 100 सीट का आवंटन कर दिया तथा आवंटन पत्र भी मेडिकल कॉलेज को प्राप्त हो गया है। प्राचार्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् द्वारा मेडिकल कॉलेज को आवंटित की एमबीबीएस की 100 सीटों का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि एमबीबीएस बैच में निरंतरता बनी रहेगी। चिकित्सा सेवा क्षेत्र की तैयारी कर रहे छात्र छात्राओं के लिए भी 100 सीटें उपलब्ध रहेंगी।
पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स आरंभ करने के विषय में प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि पूर्व में ही राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् को मांगपत्र भेजा है, इसके संदर्भ में परिषद् की टीम अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग समय पर निरीक्षण भी कर चुकी है। प्राचार्य ने विश्वास जताया कि कुछ विषयों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की अनुमति मिल सकती है। पोस्ट ग्रेजुएट सीटों की संख्या के विषय में प्राचार्य ने कहा कि ये पूरी तरह से राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद् पर निर्भर है कि वो संसाधनों के आधार पर मेडिकल कॉलेज को किस विषय की कितनी सीट प्रदान करती है।
प्राचार्य ने बताया कि इसी वर्ष मार्च में राजकीय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस का पहला बैच पास आउट होकर स्वास्थ्य क्षेत्र में कदम रख चुका है, इसमें बड़ी संख्या में एमबीबीएस के नव डिग्रीधारी डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज में ही अपनी इंटर्नशिप करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उन्हें जूनियर रेजिडेंट (कनिष्ठ आवासी) की जिम्मेदारी देकर मेडिकल कॉलेज में ही मरीजों की सेवा करने का मौका दिया है।