सहारनपुर। कोरोना काल में टैक्स पर पेनल्टी देने से ट्रांसपोर्टर इनकार कर रहे हैं और यात्री वाहनों की तरह ही लॉकडाउन पीरियड का टैक्स माफ करने की मांग कर रहे हैं। सरकार इस पर तैयार नहीं है। वहीं, यात्री वाहनों का भी टैक्स जमा नहीं कराया जा रहा है। टैक्स और पेनल्टी माफ कराने की खींचतान में प्रदेश सरकार को अब तक टैक्स के रूप में करीब 48 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
सहारनपुर विकास नगर बस यूनियन के प्रबंधक राजेंद्र सिंह बताते हैं कि दो माह की राहत बेहद मामूली है। इस मसले पर उन्होंने मीटिंग की है। इसमें चालकों, परिचालकों सहित अन्य सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य को देखते हुए फिलहाल टैक्स जमा करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन उनकी यह मांग अब भी जारी रहेगी कि छह माह के टैक्स की राहत दी जाए। कोरोना काल में जहां उनकी रोजी रोटी खतरे में पड़ी है। वहीं, सरकार को राजस्व का भी नुकसान हुआ है, लेकिन मौजूदा दौर में टैक्स से राहत ही उनके व्यवसाय को बचा सकती है। उनके मुताबिक एक बस के संचालन में ही हर माह करीब 12 से 18 हजार रुपये का खर्च आता है।
माल वाहक और यात्री वाहनों से मिलता है 12 करोड़ प्रतिमाह टैक्स
जिले में 280 से अधिक यात्री वाहन पंजीकृत हैं, जबकि तीन हजार से अधिक माल वाहक हैं। इनसे करीब 12 करोड़ रुपये प्रतिमाह टैक्स के रूप में परिवहन विभाग को मिलता है।
पेनल्टी के मामले में झुकेंगे नहीं ट्रांसपोर्टर
- टैक्स और पेनल्टी के मामले में ट्रांसपोर्टरों का रुख अब भी नरम नहीं है। उत्तर प्रदेश मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष ब्रित चावला का कहना है कि छह माह तक टैक्स या अन्य प्रपत्रों की औपचारिकता पर पेनल्टी नहीं ली जानी चाहिए। मगर इसमें कोई राहत नहीं दी जा रही है। विभाग ने सॉफ्टवेयर को भी अपडेट नहीं कराया है। इसमें बिना पेनल्टी टैक्स भुगतान ही नहीं हो रहा है। माल वाहनों के लिए महज एक माह की छूट भी महज छलावा है। इसलिए ऐसी राहत उन्हें मंजूर नहीं है।
बसों का फिर से संचालन होने की बढ़ी उम्मीद
कोरोना काल में आर्थिक बदहाली के कारण जिले में 200 से भी अधिक निजी बसों के परमिट सरेंडर कर दिए गए थे। संचालकों ने मांग की थी कि उन्हें छह माह के टैक्स और बीमा राशि के भुगतान से छूट दी जाए। तभी बसों का संचालन हो सकेगा। अब शासन से बस संचालकों के लिए अप्रैल और मई माह के लिए टैक्स में छूट की राहत दी है। इस राहत से भी निजी बस संचालक ज्यादा खुश नहीं हैं। हालांकि सरकार के इस कदम से उन बसों का संचालन फिर होने की उम्मीद है, जिनके परमिट सरेंडर कर दिए गए थे।
माल ढोने वाले वाहनों के लिए टैक्स, पेनल्टी सिस्टम
- छह टायर वाली श्रेणी के लिए 4600 रुपये प्रति तीन माह
- 10 टायर वाली श्रेणी के लिए 6000 से 6800 रुपये प्रति तीन माह
- छह टायर वाली श्रेणी में पेनल्टी 206 रुपये प्रति माह
- 10 टायर वाली श्रेणी में पेनल्टी 300 रुपये प्रति माह
सॉफ्टवेयर की समस्या के लिए एनआईसी से किया संपर्क
- यात्री और माल वाहन गाड़ियों के लिए टैक्स में राहत का फैसला शासन स्तर का है। इसमें विभाग के हाथ में कुछ भी नहीं है। जहां तक सॉफ्टवेयर में पेनल्टी फीडिंग वाली समस्या की बात है तो उसके लिए भी एनआईसी की टीम से संपर्क किया जा रहा है। संभव है कि यह समस्या भी जल्द दूर हो जाए। -- अजीत कुमार श्रीवास्तव, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन)