सहारनपुर जिले में चोरी, लूट, ठगी, हत्या जैसी घटनाओं में अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें जूझ ही रहीं हैं, लेकिन बाहरी राज्यों से ही संचालित और स्थानीय साथियों की मदद से बाहर से ही गिरोह चला रहे अपराधियों ने पुलिस की नाम में दम कर दिया है।
इनमें सबसे ज्यादा सक्रिय ठगी करने वाले गिरोह हैं। अब तक ऐसे 10 गैंग सामने आ चुके हैं। इनके सदस्यों ने हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में सक्रिय रहकर ही यहां घटनाओं को अंजाम दिया। ऐसे गिरोह के सभी सदस्यों तक पहुंचने के लिए पुलिस और साइबर टीमें जद्दोजहद कर रही हैं, लेकिन कुछ ही मामलों में सफलता मिल सकी है।
ये बड़े गिरोह दे रहे खाकी को चुनौती
केस एक - लोन दिलाने केे नाम पर ठगी करने वाला हरियाणा का गैंग। इसमें रवि, कुलदीप सहित 20 से अधिक सदस्य हिसार, करनाल, कुरुक्षेत्र और चंडीगढ़ में बैठकर में यहां ठगी कर रहे हैं। इसमें दो ही सदस्य पकड़े गए हैं। बाकी गिरफ्त से बाहर हैं। इन ठगों के कारण एक युवक अपनी जान भी गवां बैठा।
केस दो - पेटीएम और आनलाइन सट्टे के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले बड़े गिरोह का खुलासा नवंबर माह में हुआ था। इसमें मध्य प्रदेश के हवाला कारोबारी अमित सोनी के अलावा दिल्ली, हरियाणा के साथ ही नेपाल तक के सदस्य सक्रिय रहे। इसमें 10 ही आरोपी पकड़े गए। बाकी की जांच अटकी है। इसकी जांच भी आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई है।
केस तीन - आनलाइन पैसे दोगुना करने के नाम पर ठगने वाले राजस्थान के भरतपुर और जयपुर से संचालित गिरोह में सात सदस्यों की अब तक तलाश जारी है। जिले से बहुत दूर होने के कारण थाना और साइबर पुलिस की टीम वहां तक नहीं पहुंच पा रही है।
केस चार - एटीएम उखाड़ने वाले गिरोह में जिले के गंगोह के अलावा उत्तराखंड और पंजाब के सदस्य भी शामिल रहे। इनमें कुछ आरोपी तो पकड़े गए हैं। कुछ गिरफ्त से बाहर हैं। इस गिरोह ने बाहर रहते हुए स्थानीय सदस्यों से घटनाओं को अंजाम दिलवा दिया।
केस पांच - पिछले एक माह में ही वाहन चोरी और लूट की घटनाओं वाले चार गिरोह के सदस्यों में पंजाब और हरियाणा के लुधियाना, अमृतसर, यमुनानगर, अंबाला सहित अन्य शहरों के रहने वाले बदमाश शामिल रहे। इनमें 11 आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर हैं।
ये हैं पुलिस की चुनौतियां
- दूसरे राज्यों में पहुंचने के लिए अतिरिक्त टीमों और खर्च की जरूरत
- आरोपियों तक जाने के लिए बाहरी पुलिस का सहयोग न मिलना
- दूसरे प्रदेश में दबिश के समय पुलिस टीम पर हमले तक का डर
- पुलिस के जाने से पहले ही सूचनाएं लीक होने की स्थिति
- साइबर मामलों में आरोपियों का आसानी से पता न चलना
- स्थानीय साथी पुलिस से बचने में करते हैं गिरोहों की मदद
- सर्विलांस और साइबर मामलों में विशेषज्ञों की कमी
बाहरी राज्यों की पुलिस की ली जा रही मदद
पिछले कुछ महीनों में हुई घटनाओं के खुलासे में बाहरी राज्यों के गिरोहों की सक्रियता मिली है। साइबर मामलों में तो कुछ गिरोह ने बाहर से ही पूरी, ऑपरेटिंग की जबकि अन्य घटनाओं में स्थानीय साथियों की मदद ली गई। ऐसे गिरोहों के सभी आरोपियों तक पहुंचने के लिए संबंधित राज्यों की पुलिस की मदद ली जा रही है। इन घटनाओं की विवेचना और गिरफ्तारी में समय लगता है। - विनीत भटनागर, एसपी सिटी, सहारनपुर