स्वतंत्रता के लिए आंदोलन में छह माह की कठोर कारावास की सजा भुगतने वाले स्वतंत्रता सेनानी आचार्य नरदेव शास्त्री नहीं रहे। 105 वर्षीय नरदेव शास्त्री का पैतृक गांव कुरड़ी में निधन हो गया। राजकीय सम्मान से उनका अंतिम संस्कार किया गया।
कुरड़ी गांव में सन 1911 में जन्मे नरदेव शास्त्री की आरंभिक शिक्षा देवबंद में देवीकुंड स्थित संस्कृत महाविद्यालय से हुई थी। उनके पिता बलजीत आर्य मृदुभाषी व्यक्ति थे। देवबंद के बाद नरदेव शास्त्री ने अपनी पढ़ाई मुजफ्फरनगर के बिरालसी स्थित गुरुकुल, जबकि प्रथमा, मध्यमा एवं शास्त्री की पढ़ाई बनारस से पूरी की।
इसके बाद आजादी के आंदोलन में शहीद भगत सिंह ने जब सहारनपुर में रहकर बम बनाए थे तो बमों को नरदेव शास्त्री के पास देवबंद परीक्षण के लिए भेजा गया था। शास्त्री जी ने सभी बमों को कुरड़ी स्थित जंगल में ले जाकर उनकी मारक क्षमता को परखा था।
4 अप्रैल 1941 को ब्रिटिश सरकार ने नरदेव शास्त्री को कुरड़ी गांव से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद नरदेव शास्त्री को 6 माह तक सहारनपुर की जेल में कठोर कारावास की सजा दी गई। इस दौरान उन्हें यातनाएं भी सहनी पड़ी थी।
शास्त्री का सोमवार को निधन हो गया। जिनका कुरड़ी गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र अखिलेश आर्य ने दी। सहारनपुर से आई गारद ने उन्हें सलामी दी।
नरदेव शास्त्री के निधन पर स्वतंत्रता सेनानी आचार्य विशंभर देव शास्त्री, क्षेत्रीय विधायक माविया अली, एसडीएम भानू प्रताप यादव, सीओ गंगोह योगेंद्र, कोतवाल विजय प्रकाश, तहसीलदार आलोक गुप्ता, डा. सुधीर कोरी, पूरणचंद शास्त्री, मामचंद इंदु, सैय्यद वजाहत शाह, मीरा चौरासिया, तौसीफ कुरैशी, डा. शमीम देवबंद, महताब आजाद, नजम उस्मानी, भाजपा नेता राजकुमार त्यागी, देश दीपक शर्मा आदि ने शोक व्यक्त किया।