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शुल्क वसूला, सुविधाएं दी नहीं, अब निरस्त किए जा रहे भूखंड

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शुल्क वसूला, सुविधाएं दी नहीं, अब निरस्त किए जा रहे भूखंड
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सरसावा (सहारनपुर)। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अंबाला रोड पर पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया। यहां उद्योग स्थापित करने वालों को तमाम सब्जबाग दिखाए, मगर 15 साल बाद भी सुविधाएं नहीं दी गईं। जो उद्यमी सुविधाएं न मिलने पर उद्योग स्थापित नहीं कर पा रहे हैं, उन पर भूखंड निरस्त होने का खतरा लटका है। अब तक 20 से अधिक भूखंड निरस्त हो चुके हैं।
आवास विकास कालोनी निवासी राजीव अग्रवाल ने मंडलायुक्त एवी राजमौलि से मुलाकात कर बताया कि 2012 में उन्हें भूखंड पर कब्जा मिला था, जिसके बाद उन्होंने करीब 20 लाख रुपये खर्च कर उद्योग के लिए भवन बनवाया। करीब छह महीने तक उद्योग चलाया। चोरी होने के बाद काम बंद कर दिया। इसके बाद औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने उनका भूखंड निरस्त कर दिया। कोई नोटिस तक नहीं दिया। शिकायत के बाद भी कोई समाधान नहीं हो रहा है।
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2005 में बना था औद्योगिक क्षेत्र
2005 में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीए) ने पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए करीब 95 एकड़ जमीन अधिगृहीत की थी। बिजलीघर एवं सड़कों का निर्माण कराया तथा औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए भूखंड आवंटित किए। लेकिन यहां पर ड्रेनेज सिस्टम तक नहीं बन पाया है। इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित एवं केमिकल युक्त पानी कई प्लाटों में फैला है।
पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र का विवरण
- किसानों से अधिगृहीत की गई जमीन 95.45 एकड़
- विकसित क्षेत्र 25.83 एकड़
- आवंटित क्षेत्र 23.13 एकड़
- बचा हुआ विकसित क्षेत्र 2.28 एकड़
- कुल आवंटित प्लाट 1196
- जिन प्लॉट पर इकाई लगी है 497
- अधिगृहीत अविकसित जमीन करीब 70 एकड़
पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों की प्रमुख मांगे
- पानी निकासी के लिए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम
- औद्योगिक इकाइयों को सुरक्षा की दृष्टि से चारदीवारी का निर्माण
- सड़कों तथा स्ट्रीट लाइट का लगातार रखरखाव
- सफेद हाथी बनी पानी की टंकी का संचालन
- उद्यमियों की पीड़ा
- लघु उद्योग भारती के प्रभारी मुकेश शर्मा का कहना है कि औद्योगिक विकास प्राधिकरण की उदासीनता के चलते क्षेत्र पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया है। लगातार रखरखाव चार्ज वसूला जाता है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं।
- लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अनुपम गुप्ता का कहना है कि आवंटित भूखंडों को निरस्त करने में खेल चल रहा है। भूखंड निरस्त करके उद्यमियों को परेशान किया जाता है। शिकायतें की जा चुकी हैं।
- एक इकाई के संचालक अंकुर अग्रवाल ने बताया कि खाली प्लाट में भरे पानी के कारण उनकी इकाई जमींदोज होने की स्थिति में आ गई है। इसकी शिकायत यूपीएसआईडीए में कर चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला है।
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- वर्जन
राजीव अग्रवाल का भूखंड बकाया देय का भुगतान नहीं करने और कई साल बाद भी उद्योग स्थापित नहीं करने पर निरस्त किया गया है। अन्य भूखंड भी इसी कारण निरस्त हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाओं को लेकर भी कार्य चल रहा है।
- कुलदीप कुमार, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सहायक प्रबंधक
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