सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों का जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रमजान में रोजा सीख देता है कि हम बुरे कामों, बुरी बातों, गाली-गलौज और झगड़े से खुद को बचाएं।
सवाल-- छुटमलपुर निवासी अजरा ने पूछा कि मोहल्ले की महिलाएं कहती हैं कि रोजे की हालत में बच्चे को मां दूध नहीं पिला सकती। इससे रोजा टूट जाता है। क्या यह सही बात है।
जवाब- यह महिलाएं गलत कहती हैं। शरीयत में आया है कि रोजे की हालत में अगर कोई महिला बच्चे को दूध पिलाती है तो रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल-- मोहल्ला पिलखनतला निवासी उमर ने पूछा कि अगर किसी व्यक्ति का किसी गरीब पर कर्ज हो और वो उसे जकात की नीयत से माफ कर दे तो जकात अदा होगी या नहीं।
जवाब- जी नहीं, कर्ज को जकात की नीयत से माफ करने पर जकात अदा नहीं होगी।