रंग ला रही किसानों की मेहनत, बढ़ रही पैदावार
सहारनपुर। जमीनें कम हो रही हैं, खाद्यान जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में पैदावार में वृद्धि ही विकल्प है। इसी मक सद के साथ शुक्रवार को विश्व खाद्यान दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। इस मकसद और सोच के साथ आगे बढ़ने में सहारनपुर के किसान भी पीछे नहीं है। खेती में तकनीक का प्रयोग और किसानों की मेहनत रंग ला रही है। प्रति हेक्टेयर पैदावार के आंकड़े इस वृद्धि के गवाह बन रहे हैं।
उत्पादकता के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच साल में गेहूं उत्पादन में प्रति हेक्टेयर 13 क्विंटल की वृद्धि हुई है। मक्का में 12.73 और धान में 3.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। हालांकि किसानों की मुख्य फसल गन्ना ही है। लेकिन किसानों का गेहूं के प्रति रुझान बढ़ा है। पांच साल पूर्व में गेहूं का रकबा 90 हजार था, जो बढ़कर 1.10 लाख हेक्टेयर हो गया। पैदावार ही नहीं गेहूं का रकबा भी बढ़ा है। जिले में धान 60 हजार, मक्का 700, जौ की 80 हेक्टेयर में खेती होती है।
किसानों की बात
- गांव नंदी फिरोजप़ुर निवासी प्रगतिशील किसान सेठपाल सिंह ने बताया कि वह परंपरागत खेती के साथ ही विविधीकरण अपनाकर अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। गेहूं की औसत उत्पादकता 58 क्विंटल, धान की 62.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है।
- गांव बढेड़ी घोघू की प्रगतिशील महिला किसान साधना सिंह ने बताया कि गेहूं का औसत उत्पादन 52 क्विंटल, धान का 60 क्विंटल, उड़द का 13.20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। खेती में वे वर्मी कंपोस्ट खाद का काफी उपयोग करती हैं।
- पांच वर्षों की खाद्यान्न उत्पादकता (क्विंटल/प्रति हेक्टेयर)
फसल --- 2016-17 --- 2017-18 --- 2018-19 --- 2019-20 --- 2020-21 (संभावित)
धान ------ 24.59 ------26.74 ------- 25.21 ------ 27.03 ------ 27.75
मक्का ---- 15.75 ------ 15.86 -------- 23.88 ----- 25.54 ------ 28.48
गेहूं -------- 37.57 ------ 38.94 -------- 42.12 ---- 38.92 ------ 41.83
जौं --------- 27.95 ------ 28.46 -------- 30.67 ---- 41.82 ----- 41.36
(नोट: कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार)।
एफसीआई के गोदाम में खाद्यान्न का भंडारण
-- चावल -- 5734 मीट्रिक टन
-- गेहूं --- 19960 मीट्रिक टन
उप निदेशक कृषि रामजतन मिश्र ने बताया कि जिले में पिछले पांच वर्षों में गेहूं, धान और गन्ने का रकबा बढ़ा है, जबकि सरसों का रकबा घटा है। मसूर और उड़द दलहनी फसलों की उत्पादकता में बढ़ोतरी नहीं हुई है। जंगली जानवरों के कारण भी उड़द, मसूर और मूंग की खेती करने से किसान हिचकिचाते हैं, जिससे इन फसलों का रकबा कम होता है।
कृषि वैज्ञानिक वीरेंद्र सिंह का कहना है कि रासायनिक उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल पौष्टिकता में गिरावट लाता है। कई बार ज्यादा कीटनाशक इस्तेमाल करने से फसल बर्बाद भी हो जाती है। दलहनी फसलों के रकबे में कमी आने का यह भी कारण है।