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टमाटर की खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर किसान

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छुटमलपुर (सहारनपुर)। कोरोना कर्फ्यू ने सब्जी उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। दाम इतने गिरे हैं कि किसानों को फसल की लागत भी नहीं मिल रही है। किसान अपनी खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा दुर्गति टमाटर की हो रही है। मंडी में दो रुपये प्रति किलो टमाटर बिक रहा है।
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प्रदेश में एक मई से कोरोना कर्फ्यू है। इसके बाद से शादी, पार्टी, सामूहिक आयोजन, होटल, रेस्त्रा आदि सभी बंद हैं। सब्जी की खपत कम हो गई है। इसका सीधा असर सब्जी उत्पादक किसानों पर पड़ा है। क्षेत्र के शेरपुर, औरंगाबाद, रसूलपुर, चाणचक, अमानतगढ़, अलावलपुर, खुजनावर, मुजफ्फराबाद, जजनैर, नौसरहेडी सहित पचास से ज्यादा गांवों में बड़े पैमाने पर सब्जी का उत्पादन होता है।
मंडी में फिलहाल टमाटर की 25 किलो की कैरेट पचास से साठ रुपये, तीस किलो गोभी का बोरी सौ से लेकर 120 रुपये, खीरा चार से पांच रुपये किलो, बंद गोभी दो रुपये किलो। लोकी ढाई रुपये से तीन रुपये, कद्दू साढ़े तीन रुपये किलो बिक रहा है।
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गांव औरंगाबाद के अरविंद ने दो बीघा, केहर सिंह ने ढाई, अश्वनी, विपिन ने सात, सुंदरलाल ने सात, शेरपुर खानाजादपुर के अजय ने दस, काका ने 12, खुजनावर के मतलूब राव ने 15 बीघा टमाटर लगा रखा है। इनका कहना है कि लागत तो दूर की बात तुडाई और मंडी ले जाने का खर्च भी नहीं मिल रहा है। गंदेवडा के हाजी अय्यूब प्रधान, ऋषिपाल सिंह, अखलाक, नौसरहेडी के कंवरपाल प्रधान ने बताया कि इस बार गोभी उत्पादन घाटे का सौदा साबित हुआ है।
सात बीघा टमाटर की फसल पर चला दिया ट्रैक्टर
गांव औरंगाबाद के किसान लाल सिंह ने अपनी सात बीघा टमाटर की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है। इनका कहना है कि फसल पर बीस हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च आया था। अब मंडी में दो रुपये का भाव मिल रहा है।
तुरई उत्पादक किसानों को राहत
सब्जी उत्पादन कोरोना काल में जहां घाटे का सौदा साबित हो रहा है वहीं काली तुरई उत्पादक किसान राहत महसूस कर रहे हैं। तुरई का भाव मंडी में 16 से 20 रुपये प्रति किलो है। बीस किलो की पोटली चार सौ रुपये तक बिक रही है। छुटमलपुर मंडी यार्ड के आढ़ती अंकित गोयल बताते हैं कि क्षेत्र में बुखार और अन्य बीमारियों के प्रकोप के चलते लोग तुरई का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने की सब्जी उत्पादकों के लिए मुआवजे की मांग
भाकियू के जिला उपाध्यक्ष डॉ. राजबीर कांबोज और भाकियू तोमर के मंडल प्रभारी अजय पुंडीर का कहना है कि सरकार फसलों के नुकसान का आंकलन संबंधित लेखपालों से करा कर सब्जी उत्पादक किसानों को मुआवजा देने का काम करे।
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