सहारनपुर। कुपोषण के दंश को कम करने के लिए गोआश्रय स्थल से अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवार को गाय देने की योजना एक वर्ष बाद भी परवान नहीं चढ़ पाई है। क्योंकि, पशुपालन विभाग के सर्वे में गोआश्रय स्थलों में मात्र छह ही दुुुधारू गाय मिली हैं, जिनको कुपोषित बच्चों के परिवारों को सौंप दिया, जबकि जिले में 1246 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। ऐसे में 1240 बच्चे योजना से वंचित रह गए।
सितंबर में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत विभिन्न कार्यक्रम हुए। इसके साथ ही बाल एवं पुष्टाहार विभाग ने सर्वे कराया तो जनपद में करीब 20 हजार कुपोषित और 1246 बच्चे अत्यंत कुपोषित सामने आए। बच्चों में कुपोषण को खत्म करने के लिए पिछले वर्ष सितंबर माह में ही शासन ने गो आश्रय स्थल से अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवार को एक-एक गाय देने के निर्देश दिए थे। इस योजना के तहत अब तक मात्र छह बच्चों के परिवारों को ही दुधारू गाय मिल पाई है। ऐसे में 90 प्रतिशत बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
12 गोआश्रय स्थल में ढाई हजार गोवंश, दुधारू सिर्फ छह
जनपद में नगर निगम सहित प्रत्येक विकासखंड स्तर के मिलाकर 12 गोआश्रय स्थल हैं, जिनमें करीब ढाई हजार गोवंश है, लेकिन इनमें मात्र छह ही दुधारू गाय मिली हैं।
प्रत्येक माह मिल रहा चारे का पैसा, 900 रुपये हैं कम
योजना का लाभ पाने वाली गांव चौराखुर्द निवासी रज्जो देवी, रेखा देवी, संभालकी जुनारदार निवासी संयोगिता का कहना है कि गाय के चारे का पैसा प्रत्येक माह मिलता है, लेकिन 900 रुपये बेहद कम हैं। इसमें मात्र एक सप्ताह का ही चारा आ पाता है। प्रत्येक दिन 100 रुपये के हिसाब से सरकार को हर माह तीन हजार रुपये देने चाहिए।
गो आश्रय स्थलों का सर्वे कराया गया था। छह दुधारू गाय मिली थीं, जिनको अत्यंत कुपोषित बच्चों के परिवारों को सौंप दिया गया है। भविष्य में जो भी दुधारू गाय मिलेंगी, उनको भी कुपोषित बच्चों के परिजनों को दे दिया जाएगा। -- राजीव सक्सेना, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
दुधारू गाय अत्यंत कुुुपोषित बच्चों को देने के लिए समय-समय पर विभाग की ओर से पशुपालन विभाग को पत्र लिखा गया है। विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक बच्चे के परिवार को दुधारू गाय मिले। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी