छुटमलपुर/ अंबेहटा/ नागल (सहारनपुर)। हिंदी दिवस पर जिले के देहात के स्कूलों में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस दौरान बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भागेदारी कर हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
छुटमलपुर के प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में शिक्षक अंजली आर्य ने बच्चों को हिंदी दिवस के बारे में जानकारी देते हुए बताया भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाया। इसे वैसे तो 26 जनवरी 1950 को संविधान द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में प्रयोग करने को स्वीकृति (अनुच्छेद 343 के तहत) दी। हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलने के कारण 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ। इस अवसर पर बच्चों को पोस्टर प्रतियोगिता व क्राफ्ट प्रतियोगिता कराई। इसमें बच्चों ने बहुत ही सुंदर सुंदर पोस्टरों व क्राफ्ट बनाकर दिखाए। प्रधानाध्यापक कर्ण सिंह, कमलेश राणा, सोनिया, शान, सानिया, मंतशा, मिस्बाह, सर्बिया, समद, जैद आदि बच्चे उपस्थित रहे।
अंबेहटा के अजीत सिंह सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रधानाचार्य आनंद पाल सिंह ने कहा हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है तथा यह सभी भाषाओं की मूल है जो हमें संस्कारवान तथा ज्ञानवान बनाती है, इसलिए हम सब को हिंदी का सम्मान करना चाहिए। आचार्य सुंदर कुमार वत्स तथा अनीता देवी ने भी विचार रखे। प्रबंध समिति के अध्यक्ष पवन सैनी, प्रबंधक गौरव मित्तल, उप प्रबंधक सचिन मित्तल, कोषाध्यक्ष सरदार कश्मीर सिंह, समिति के सदस्य वेद भूषण गुप्ता, अश्वनी मित्तल, आचार्य रामपाल शर्मा, अनुरंजन गुप्ता, नागेंद्र पंवार, आचार्य मोनिका सैनी, प्रियंका देवी, नीता देवी रहे।
नागल के सोफिया इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी दिवस पर कबीर दास, तुलसीदास, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद आदि के हिंदी साहित्य में योगदान से अवगत कराया। स्कूल प्रबंधक कोणार्क चौधरी और प्रधानाचार्य अंशुल सिंघल ने कहा कि बच्चों को हिंदी गर्व के साथ बोलनी चाहिए। यह हमारी मातृभाषा है। संचालन कल्पना शर्मा ने किया।
नागल में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित बच्चें- फोटो : SAHARANPUR