राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थागत प्रसव के बाद देखभाल और बीमारी में इलाज कराने की प्रवृत्ति बेहतर हुई है। जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 26.7 से बढ़कर 37.1 प्रतिशत हुआ है यानी 10.4 प्रतिशत सुधार हुआ, लेकिन छह माह तक स्तनपान, विटामिन-ए और महत्वपूर्ण टीकों में गिरावट आई है। छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की दर 46.2 प्रतिशत गिरी है।
हेपेटाइटिस-बी की तीसरी खुराक पाने वाले बच्चों का प्रतिशत 82.7 से घटकर 62.8 प्रतिशत हो गया। विटामिन-ए की खुराक पाने वाले बच्चों में भी गिरावट आई। 82.7 से घटकर 65.5 प्रतिशत पहुंच।
मां का दूध सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह का कहना है कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए केवल भोजन नहीं, बल्कि सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। यह शिशु का पहला टीका है, जो संक्रमणों से बचाने, कुपोषण रोकने और उसके शारीरिक एवं मानसिक विकास की मजबूत नींव रखता है।