न कोई मन्नत, न दिखावा, अकेले चल पड़े भोले की राह
मनोज का कहना है कि यह यात्रा उन्होंने किसी मन्नत या दिखावे के लिए नहीं की है। उन्होंने न तो कोई अभ्यास किया, न ही कोई पूर्व योजना बनाई थी। केवल भोले बाबा का नाम लिया और 351 लीटर गंगाजल को दोनों कंधों पर दो बड़ी केनों में बांधकर निकल पड़े।
एक दिन में तय करते हैं एक किमी की दूरी
हर केन में लगभग 175 लीटर जल है और इसका कुल वजन इतना अधिक है कि मनोज एक दिन में मात्र एक किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि इस गंगाजल को अपने कंधों पर अकेले उठाकर हरिद्वार से लेकर अब तक सफर किया है। गांव तक पहुंचने में अभी लगभग 6-7 दिन और लग सकते हैं।
विलक्षण प्रतिभा को देखकर हर कोई रह जाता है हैरान
मनोज की इस विलक्षण भक्ति-यात्रा को देखकर राह चलते लोग हैरान रह जाते हैं। कोई उन्हें प्रणाम करता है, कोई जल पिलाता है, तो कोई उनके साहस को सलाम करता है। उनकी इस साधना ने कांवड़ यात्रा को एक नया रूप और गहराई दे दी है।