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गजब हाल: यूपी के सहारनपुर में जिंदा व्यक्ति का बना दिया मृत्यु प्रमाणपत्र, निगम पहुंचा पीड़ित 

Wed, 24 Nov 2021 05:30 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नगर निगम ने जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया। पीड़ित ने मामले की शिकायत अधिकारियों से की तो सामने आया कि व्यक्ति का साल 2012 में मृत्यू प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था। आरोप है कि पीड़ित के भाई ने यह प्रमाण पत्र जारी कराया है। वहीं मामले में जांच शुरू कर दी गई है।  
 
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पीड़ित राकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नगर निगम ने जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बना दिया। पीड़ित व्यक्ति प्रमाणपत्र निरस्त कराने की मांग लेकर नगर निगम पहुंचा। प्रमाणपत्र 2012 का जारी किया हुआ है। संबंधित अधिकारियों ने रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि पीड़ित की मां के नाम से शपथ पत्र लगाया गया था। अब निगम ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 

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राकेश कुमार ने बताया कि वह बड़गांव क्षेत्र के गांव नूनाबड़ी में रहते हैं। वर्ष 2012 में वह शहर की रक्खा कॉलोनी में रहते थे। दस जुलाई 2012 को उनके पिता हरद्वारी का निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद वह काम के लिए बाहर चला गया था। कुछ माह बाद जब वह लौटा तो पता चला कि उसके भाई ने उसके हिस्से की भी जमीन अपने नाम करा ली है।

जब उसने तहसील से कागज निकलवाए तो वहां उसका मृत्यु प्रमाणपत्र लगा पाया गया, जो नगर निगम ने 31 अक्तूबर 2012 को जारी किया गया था। मृत्यु प्रमाणपत्र का क्रमांक संख्या 2576 है, जिसमें राकेश कुमार पुत्र हरद्वारी निवासी खाताखेड़ी लिखा है।
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पीड़ित का आरोप है कि उस समय जन्म एवं मृत्य प्रमाण पत्र विभाग में कर्मचारियों ने उसके भाई के साथ मिलकर साज कर फर्जी प्रमाणपत्र जारी किया है। पीड़ित ने दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा मृत्यु प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग की है।

उधर, नगर निगम ने अपना रिकॉर्ड खंगाला है, जिसमें राकेश कुमार के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उनकी मां की ओर से शपथ पत्र दिया जाना पाया गया है। राकेश का कहना है कि उनकी मां पढ़ी लिखी नहीं हैं। उनसे धोखे से अंगूठा लगवाया गया होगा। 

जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जाने की जानकारी नहीं है। यदि मामला 2012 का है तो रिकॉर्ड निकलवाकर दिखवाया जाएगा, क्योंकि मामला 11 वर्ष पुराना है। शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी। 
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