पीड़ित का आरोप है कि उस समय जन्म एवं मृत्य प्रमाण पत्र विभाग में कर्मचारियों ने उसके भाई के साथ मिलकर साज कर फर्जी प्रमाणपत्र जारी किया है। पीड़ित ने दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा मृत्यु प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग की है।
उधर, नगर निगम ने अपना रिकॉर्ड खंगाला है, जिसमें राकेश कुमार के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उनकी मां की ओर से शपथ पत्र दिया जाना पाया गया है। राकेश का कहना है कि उनकी मां पढ़ी लिखी नहीं हैं। उनसे धोखे से अंगूठा लगवाया गया होगा।
जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जाने की जानकारी नहीं है। यदि मामला 2012 का है तो रिकॉर्ड निकलवाकर दिखवाया जाएगा, क्योंकि मामला 11 वर्ष पुराना है। शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।