बड़ी बेटी पिता के लिए चांद पर प्लाट कर करा चुकी है रजिस्ट्री
नगर निगम की पार्षद पिंकी गुप्ता के घर में केवल दो बेटियां
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। कुछ बेटियां सफलता के नये आयाम गढ़कर समाज की उस सोच को बदलने का काम कर रही हैं, जो उन्हें बेटों से कम आंकता है। ऐसा ही कुछ काम किया है सहारनपुर नगर निगम की पार्षद की बेटियों पूजा और श्रुति ने।
माधोनगर निवासी व्यापारी विवेक गुप्ता और पार्षद पिंकी गुप्ता के यहां केवल दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी पूजा गुप्ता पति के साथ लुसका में रहती हैं। वह एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी करती हैं। खास बात यह है कि पूजा ने बीते दिनों फादर्स डे पर अपने पिता विवेक को चांद पर प्लाट की रजिस्ट्री कराकर तोहफे में दी थी। वह सहारनपुर की ऐसी पहली बेटी हैं, जिन्होंने यह अनूठा काम किया। दूसरी बेटी श्रुति गुप्ता भी शादीशुदा हैं, जो पति के साथ दुबई में शिफ्ट हैं। पूजा और श्रुति का कहना है कि वह अपने माता और पिता को ऐसा कभी महसूस नहीं होने देना चाहती हैं कि उनके यहां बेटा नहीं है। उधर, पिता विवेक गुप्ता और मां पिंकी गुप्ता अपनी बेटियों की सफलता से बेहद खुश हैं। पिंकी ने बताया कि उनको इस बात का कतई मलाल नहीं है कि उनके यहां बेटा नहीं है। उनकी बेटियों ने जो किया है वह कई बेटे भी नहीं कर पाते हैं। उनका कहना है कि बेटियों को बराबर के अधिकार और अवसर मिलें तो वह किसी भी क्षेत्र में बेटों की तरह नाम रोशन कर सकती हैं।
अफसर बन बेटी ने बढ़ाया मान
सहारनपुर। महानगर के पंत विहार निवासी व्यापारी चंद्रप्रकाश शर्मा और रोजी शर्मा की होनहार बेटी रोमा प्रकाश शर्मा ने कंबाइंड स्टेट अपर सब ऑर्डिनेट सर्विस परीक्षा 2018 में सफलता हासिल की है। वह वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर पद मिला है। बेटी के अफसर बनने से पिता चंद्रप्रकाश शर्मा और मां रोजी शर्मा बेहद खुश हैं। पिता चंद्रप्रकाश का कहना है कि उन्होंने कभी भी अपने बेटे और बेटी में अंतर नहीं समझा। दोनों की परवरिश में कोई अंतर नहीं रखा। यही वजह है कि आज दोनों परिवार का नाम चमका रहे हैं।
बोर्ड परीक्षाओं में चमकी बेटियां
जून और जुलाई माह में आयोजित यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के परीक्षा परिणाम में बेटियों ने खुद को साबित किया। दस जुलाई को जारी हुए आईसीएसई के परिणाम में श्वेता लूथरा ने 12वीं में जिला टॉप किया। सीबीएसई की दसवीं कक्षा में दून वैली स्कूल की श्रेया सिंघल ने 99.2 फीसदी अंकों के साथ जनपद टॉप किया। इनके अलावा बाल गृह (बालिका) में रहने वाली दीपा ने 12वीं में 76.4 फीसदी अंक हासिल किया। यूपी बोर्ड की बात करें तो दसवीं 38224 विद्यार्थी पंजीकृत थे, इनमें से करीब 17 हजार छात्राओं ने सफलता पाई। 12वीं में भी पंजीकृत 33477 में से करीब 12 हजार छात्राएं सफल हुईं ।
बेटी को लेकर समाज की सोच में काफी परिवर्तन आया है। इस परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ा कारण व्यक्ति का शिक्षित होना और छोटे परिवार की चाह है। इसके अलावा बेटियां तमाम क्षेत्रों में बेटों की तरह आगे बढ़ रही हैं। उनकी सफलताओं ने भी समाज की सोच को बदला है। - डॉ. वाईएस तोपाल, समाजशास्त्री।
बेटी को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। अब बेटी के पैदा होने पर भी लोग मिठाई बांटने लगे हैं यह अच्छी बात है। गौर करने वाली बात यह है कि बेटी होने पर सबसे अधिक परेशान भी घर की बड़ी महिलाएं ही होती थीं। मगर अब उनमें भी परिवर्तन आया है। - डॉ. नैना मिगलानी, स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ।