इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा (एग्जीक्यूटिव कमेटी) की बैठक दूसरे दिन तीसरे चरण के साथ ही संपन्न हो गई। मजलिस-ए-शूरा बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई तो वह निश्चित तौर पर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
दरअसल, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने 22 फरवरी को सहारनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र को पत्र भेजकर दारुल उलूम के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश दिए थे। इसमें दारुल उलूम की वेबसाइट पर वर्ष 2015 में लिए गए एक फतवा का जिक्र करते हुए कहा गया था कि दारुल उलूम ने गजवा-ए-हिंद को लेकर जो जवाब दिया है वह देशद्रोह की श्रेणी में आता है। मामले में स्थानीय अधिकारियों ने दारुल उलूम प्रबंधन से उनका पक्ष जाना था।