मुजफ्फरनगर। विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट ने जमानत प्रार्थना पत्र पर आख्या प्रस्तुत न करने के मामले में बुढ़ाना थानाध्यक्ष सुभाष अत्री को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया कि कर्तव्यों में लापरवाही बरती गई है। थानाध्यक्ष के आचरण को दुराचरण की श्रेणी में मानते हुए पुलिस अधिनियम की धारा 29 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है। अदालत ने थानाध्यक्ष को 30 जुलाई तक लिखित में कारण स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए।
विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर की अदालत में गुलवेज नामक अभियुक्त के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है। अदालत को यह जमानत प्रार्थना पत्र 14 जुलाई को प्राप्त हुआ था।
विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि पैरोकार प्रदीप कुमार ने कई बार कहने के बावजूद आख्या और केस डायरी प्रस्तुत नहीं की गई। उन्होंने थानाध्यक्ष सुभाष अत्री से भी इस संबंध में बात की थी।
अभियुक्त गुलवेज इस समय कारागार में बंद है। अदालत ने पाया कि विशेष लोक अभियोजक ने 22 से 25 जुलाई तक मौखिक रूप से समय मांगने के बावजूद आख्या नहीं मिली। इस लगातार देरी को अदालत ने गंभीरता से लिया। अदालत को प्रतीत हुआ कि थानाध्यक्ष जानबूझकर अभियुक्त को अनावश्यक रूप से कारागार में रखना चाहते हैं।
थानाध्यक्ष सुभाष अत्री के आचरण को गंभीर माना है। इसे कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और दुराचरण की श्रेणी में रखा गया है।
थानाध्यक्ष को लिखित में कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें बताना होगा कि उनके विरुद्ध पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 29 के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस की एक प्रति अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन को भी भेजी गई है।
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नोटिस की जानकारी नहीं : अत्री
बुढ़ाना थानाध्यक्ष सुभाष अत्री ने कहा कि उन्हें कोर्ट के नोटिस की जानकारी नहीं है। अभी तक उनसे आख्या नहीं मांगी गई है।