सहारनपुर। नगर निगम कचरे से बिजली बनाने के सपने जनता को दिखा रहा है। बीपीसीएल के साथ नगर निगम ने एक बार फिर अनुबंध किया है, लेकिन बिजली कब बनेगी यह समय ही बताएगा।
वर्ष 2019 में ज्ञानेंद्र सिंह नगर आयुक्त थे। तब नगर निगम का साउथ कोरिया की कंपनी के साथ समझौता हुआ था, जिसमें साउथ कोरिया की कंपनी को कचरे से बिजली बनानी थी। इसके बाद वर्ष नौ दिसंबर 2023 में बीपीसीएल के साथ अनुबंध हुआ, लेकिन बिजली बनाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब फिर से अनुबंध हुआ है। अपर नगरायुक्त मृत्युंजय ने बताया कि घुन्ना महेश्वरी में बीपीसीएल के सहयोग से एक सीबीजी संयंत्र की स्थापना के लिए अनुबंध पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए गए हैं।
सहारनपुर में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 391 मीट्रिक टन (टीपीडी) ठोस अपशिष्ट निकलता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा बायोडिग्रेडेबल है। इस अपशिष्ट को जिम्मेदारी से प्रबंधित करने और इसे एक मूल्यवान संसाधन में बदलने के प्रयास में निगम ने बायोगैस उत्पादन के लिए यह अनुबंध किया है। उन्होंने बताया कि निगम ने बीपीसीएल को प्रतिदिन 150 से 180 टीपीडी पृथक जैविक अपशिष्ट की आपूर्ति करने की प्रतिबद्धता जताई है। प्लांट की क्षमता 150 टीपीडी है। संयंत्र के चालू हो जाने पर लगभग 150 टीपीडी जैविक अपशिष्ट की आपूर्ति करने पर लगभग पांच से आठ टन प्रतिदिन सीबीजी तथा 20 टन प्रतिदिन खाद का उत्पादन होगा।
नगरायुक्त शिपू गिरि ने बताया कि इस अनुबंध के माध्यम से नगर निगम और बीपीसीएल के बीच सार्वजनिक निजी भागेदारी को औपचारिक रूप दिया गया है। सीबीजी प्लांट को बीपीसीएल द्वारा विकसित और संचालित किया जाएगा। इस प्लांट के स्थापित हो जाने से कूड़ा निपटान की दिशा में सहारनपुर के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होगा। महापौर डॉ. अजय कुमार ने इस दिन को सहारनपुर के लिए स्वर्णिम दिन बताते हुए कहा कि बीपीसीएल के अधिकारियों के अनुसार यह संयंत्र करीब डेढ़ वर्ष में कार्य करना शुरू कर देगा।