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पिछड गया जूता उद्योग के सीएफसी का निर्माण

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सहारनपुर। कोरोना संकट के चलते जनपद में जूता उद्योग के लिए करीब 12.65 करोड़ रुपये से पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित सीएफसी (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) का निर्माण पिछड़ गया है। हालांकि अब इसकी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) से लेकर लेआउट तक बनकर तैयार है। इसे शीघ्र ही उद्योग विभाग के पोर्टल पर अपलोड करने की तैयारी है। इसके बनने से न सिर्फ जिले के करीब दस हजार कारीगरों को उच्च गुणवत्ता युक्त जूते बनाने में मदद मिलेगी बल्कि जूतों के निर्यात के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
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जनपद में जूता बनाने का काम करीब 100 वर्ष पुराना है। यहां पर छोटी-छोटी करीब 500 जूता निर्माण की इकाइयां हैं। जिनका वार्षिक कारोबार करीब 110 से 125 करोड़ रुपये का है। परंपरागत तरीके से काम करने के चलते यहां तैयार जूते बाहर के बाजारों में अन्य ब्रांडों से मुकाबला नहीं कर पाते। जिससे यहां के उद्यमियों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। साथ ही जूतों की लागत भी बढ़ जाती हैं। जिससे यहां का जूता उद्योग तरक्की नहीं कर पा रहा है। इसके चलते सुगत सोशल वेलफेयर एसोसिएशन पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग विभाग के सहयोग से 1255 वर्ग मीटर क्षेत्र में कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना करने की तैयारी में है। इसके लिए उनको न सिर्फ उद्योग विभाग से प्राथमिक स्वीकृति मिल गई है, बल्कि पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में जमीन भी उपलब्ध कराई गई है।
कारीगरों को मिलेंगी कई सुविधाएं
कॉमन फैसिलिटी सेंटर में जूता उद्यमियों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। इसमें नवीनतम तकनीक से लैस मशीनें लगेंगी। इसमें जूते की डिजाइनिंग, सिलाई, लॉस्टिंग आदि का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। इसमें रॉ मैटीरियल बैंक भी स्थापित होगा। जिससे लघु उद्यमियों और कारीगरों को सस्ते दाम पर कच्चा माल उपलब्ध होगा। इससे उद्यमी उच्च गुणवत्ता युक्त जूते तैयार कर अच्छा मुनाफा कमा सकेंगे।
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इन क्षेत्रों में होता है जूता बनाने का कार्य
महानगर के कई मोहल्लों में जूता बनाने का काम होता है। इनमें आदर्श विहार, किशनपुरा, शारदा नगर जाटव नगर, मैदा मिल फाटक, रामघाट, जेल चुंगी, शेखपुरा, गढ़ी मलूक आदि मोहल्लों में जूता बनाने का काम होता है। यहां घरों में छोटी इकाइयों में जूते बनाए जाते हैं।
उद्यमी बोले
कोरोना संकट के चलते पिछड़ा काम
सीएफसी बनाने में जुटी संस्था सुगत सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीन कर्दम का कहना है कि दो वर्षों तक कोरोना संकट के चलते सीएफसी का काम आगे नहीं बढ़ पाया है। इसकी डीपीआर और लेआउट तैयार हैं। जिन्हें एक सप्ताह में उद्योग विभाग के पोर्टल पर अपलोड करा दिया जाएगा। उम्मीद है जल्द ही सीएफसी का काम शुरू हो जाएगा।
उत्पादन लागत घटेगी
जूता उद्यमी कुलदीप शिवा का कहना है कि सीएफसी बनने से स्थानीय उद्यमियों को नई तकनीक युक्त मशीनें सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगी। इससे यहां बनने वाले जूतों की गुणवत्ता में सुधार होगा और बाजार में अच्छे दाम मिलेंगे। यह यहां के जूता उद्यमियों और कारीगरों के लिए वरदान साबित होगा।
सुगत सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के कलस्टर के सीएफसी के प्रस्ताव को सैद्घांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इसका निर्माण भी शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है। इसके बनने से जनपद में उच्च गुणवत्ता युक्त जूतों का उत्पादन होगा। - सिद्धार्थ यादव, उप आयुक्त उद्योग
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