यह था मामला
वर्ष 2019 में बजरंग दल के प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने दारुल उलूम की लाइब्रेरी पर हेलीपैड बनाए जाने और बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। जिसके बाद सीएम कार्यालय से मामले की जांच के आदेश हुए थे। तत्कालीन डीएम आलोक कुमार पांडेय और एसएसपी दिनेश कुमार पी. ने इसकी जांच की थी। जिसमें हेलीपैड तो बनना नहीं पाया गया, लेकिन बिना अनुमति लाइब्रेरी और अन्य निर्माण कार्य होना मिला था। जिसमें भवन को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी और कंपाउंडिंग की गई थी।
यह भी पढ़ें: UP: प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल, अब खुल रही घोटाले की पोल, कर्मचारियों ने भी खड़े किए तीन मंजिला मकान
पहले यह 40 करोड़ रुपये का कंपाउंड शुल्क लगाया था, जो दूसरे रीजनल टाउन प्लानर मेरठ ने मात्र 39 लाख रुपये कर दिया था। इसमें दारुल उलूम प्रबंधन की ओर से सहयुक्त नियोजक मेरठ कार्यालय के यहां करीब 25 लाख रुपये का जुर्माना भी पूर्व में जमा कराया गया था।