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आतंक के खिलाफ: देवबंद में बनेगा कमांडो ट्रेनिंग सेंटर, सबसे पहले यहां सामने आई थी जैश की हरकत

Wed, 18 Aug 2021 01:44 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अजहर मसूद को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने 1994 में हापुड़ से तीन विदेशी नागरिकों का अपहरण कर लिया था और सहारनपुर के खाताखेड़ी में लाकर एक मकान में बंद करके रखा था।
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देवबंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमी यूपी में आतंक की जड़ें बहुत गहरी हैं। कभी शामली के कैराना तो कभी सहारनपुर से संदिग्ध गतिविधियां उजागर होती रही हैं। खास बात यह है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की पश्चिमी यूपी में सक्रियता भी सबसे पहले सहारनपुर में ही सामने आई थी। ऐसे में देवबंद में बनने वाला एटीएस का कमांडो ट्रेनिंग सेंटर कई मायने में अहम होगा, जिसके जरिये एटीएस द्वारा आतंकी गतिविधियों पर करारी चोट की जा सकेगी।

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दरअसल, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अजहर मसूद को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने 1994 में हापुड़ से तीन विदेशी नागरिकों का अपहरण कर लिया था और सहारनपुर के खाताखेड़ी में लाकर एक मकान में बंद करके रखा था। जिस कार से विदेशी नागरिकों को सहारनपुर लाया गया था, उसका ड्राइवर गाजियाबाद जनपद में पकड़ा गया था। इसके बाद खाताखेड़ी में आतंकियों की घेराबंदी हुई और मुठभेड़ के दौरान इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव सहित दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। एक आतंकी को भी मार गिराया था, लेकिन कई आतंकी फरार हो गए थे। तब विदेशी नागरिकों को मुक्त करा लिया गया था। 

यह पहली वारदात थी, जिसमें पश्चिमी यूपी में जैश ए मोहम्मद की सक्रियता उजागर हुई थी। हालांकि इसके बाद मुजफ्फरनगर जिले के गांव जौला से भी जैश-ए-मोहम्मद का एरिया कमांडर मोहम्मद वारस गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा हाल ही में बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर पार्सल ब्लास्ट मामले में शामली जिले के कैराना निवासी सलीम और उसके भाई को एनआईए एवं एटीएस ने गिरफ्तार किया था। इसके अलावा भी मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर से ऐसे संदिग्धों की गिरफ्तारी पूर्व के वर्षों में होती रही है। जाहिर है देवबंद में एटीएस का कमांडो ट्रेनिंग सेंटर बनने पर आसपास के जिलों में भी संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। 
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संदिग्ध गतिविधि वाले प्रमुख मामले 
-1991 में लक्ष्मी सिनेमा में बम फटा था, जिसमें आठ से दस लोग मारे गए थे। उस समय घटना में आतंकियों का हाथ बताया गया था।
-1994 में तीन ब्रिटिश नागरिकों को बंधक बनाकर आतंकियों ने सहारनपुर के खाताखेड़ी में रखा था। इन्हें छुड़ाने के लिए मुठभेड़ होने पर इंस्पेक्टर ध्रुवलाल सहित दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी।
-किफायतउल्लाह उर्फ जाफर अहमद उर्फ अताउर्रहमान उर्फ अल उल्लाह सरसावा क्षेत्र का रहने वाला था। जो बाद में जम्मू कश्मीर गया था, फिर आतंकी संगठन हूजी का चीफ बना।
 -2001 में आतंकी गतिविधियों के चलते मुफ्ती इसरार को एक मदरसे से पुलिस ने पकड़ा था।
-2005 में अयोध्या में हुए बम कांड में तीतरो के डाक्टर इरफान को पकड़ा गया था। 
-अगस्त 2010 में पाकिस्तानी जासूस शाहिद उर्फ इकबाल भट्टी को पटियाला से गिरफ्तार किया। उसने देवराज सहगल के नाम से सहारनपुर से डीएल एवं अन्य दस्तावेज बनवा लिए थे।
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-सितंबर 2015 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने सहारनपुर रेलवे स्टेशन के बाहर से हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख को गिरफ्तार किया था। 
-22 फरवरी 2019 को एटीएस और पुलिस ने देवबंद से जैश ए मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज और आकिब अहमद को गिरफ्तार किया। 
- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहारनपुर में रहने वाले बांग्लादेशी भी कई बार पकड़े जा चुके हैं। 

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