फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सर्दी और प्रदूषण ने बढ़ाई सांस के मरीजों की तकलीफ

विज्ञापन
जिला अस्पताल में ओपीडी पर लगी मरीजो की भीड़ - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। सर्दी के साथ ही हवा में घुला प्रदूषण का जहर सांस के मरीजों की समस्या बढ़ा रहा है। नतीजा यह है कि चेस्ट फिजीशियन की ओपीडी में दो माह पहले की तुलना में दोगुने से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक की सलाह है कि सांस के मरीजों को इलाज से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
विज्ञापन

सर्दियों के दिनों में हवा में नमी होने की वजह से हवा भारी हो जाती है, जो ऊपर उठने की बजाय जमीन के आसपास बनी रहती है। ऐसे में हवा में घुले धूल और धुएं के कण हवा में रहते हुए सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सांस के मरीजों की तकलीफ को बढ़ाते हैं। दीपावली के बाद से एक्यूआई 250 और उससे अधिक चल रहा है। इसकी वजह से सांस के मरीजों की समस्या बढ़ना लाजिमी है। एसबीडी जिला अस्पताल में चेस्ट फिजीशियन की ओपीडी में दो माह पहले तक प्रतिदिन 100 से 125 तक मरीज पहुंच रहे थे, जिनकी संख्या अब 200 से अधिक पहुंच रही है। ज्यादातर मरीज खांसी के हैं
धूल के गुबार भी बड़ी वजह
शहर में जगह-जगह सीवर लाइन बिछाने, नाला निर्माण, भवन निर्माण आदि चल रहे हैं। सड़कों को जगह-जगह खोदकर छोड़ा है। वाहनों के चलने से सड़कों पर खोदकर छोड़ी गई मिट्टी उड़कर हवा को दूषित कर रही है।
विज्ञापन

वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां
- जुकाम होना और सांस लेने में तकलीफ।
- आंखों में जलन, खांसी का होना और गले में इंफेक्शन
- अस्थमा, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां।
वायु प्रदूषण से बचाव
घर से बाहर निकलते वक्त हमेशा मुंह पर मास्क का उपयोग करें। आंखों पर चश्मा लगाएं।
मास्क का बार-बार प्रयोग न करें। इससे वायरस और कई तरह के इंफेक्शन फैलाने वाले
बैक्टीरिया की चपेट में आ सकते हैं।
वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों जैसे औद्योगिक क्षेत्र, बाजार आदि में बेवजह न जाएं। ठंड शुरू होने के साथ ही ओपीडी में सांस और खांसी के मरीज बढ़ गए हैं। इसकी प्रमुख वजह ठंड और हवा में प्रदूषण का बढ़ना है। ठंड के दिनों में सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
विज्ञापन

डॉ. जी रहमान, चेस्ट फिजीशियन, एसबीडी जिला अस्पताल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें