सीएम बोले- 2017 में सिर्फ 36 प्रतिशत स्कूल ही थे संतृप्त
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद के केवल 36 प्रतिशत विद्यालय ही आवश्यक सुविधाओं से पूरी तरह संतृप्त थे। अधिकांश स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय, मिड-डे मील के लिए रसोईघर और चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।
उन्होंने बताया कि सरकार ने स्थिति बदलने के लिए 'ऑपरेशन कायाकल्प' शुरू किया। इसके तहत जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में व्यापक स्तर पर आधारभूत सुविधाएं विकसित की गईं।
हर स्कूल में तय किए गए सुविधा मानक
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत प्रत्येक विद्यालय के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए। इनमें बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय, मिड-डे मील की समुचित व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को मजबूत बना सके।
23 हजार दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेंड, कौशल आधारित शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025-26 में लगभग 23 हजार दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेंड उपलब्ध कराया है। उन्होंने बताया कि 'लर्निंग बाय डूइंग' के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चों को कौशल आधारित शिक्षा दी जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति बच्चों की स्किलिंग और व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर देती है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और क्षमता का विकास हो रहा है।
शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का बढ़ाया मानदेय, स्वास्थ्य सुरक्षा भी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये तथा अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये कर दिया है। इसके साथ ही शिक्षा मित्रों, शिक्षकों, अनुदेशकों, रसोइयों और अन्य कर्मियों के लिए पांच लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
अगले 15 दिन हर घर पहुंचें, बच्चों का कराएं नामांकन
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों से अगले 15 दिनों तक विशेष अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर परिवार तक पहुंचें, ग्राम पंचायतों और वार्डों में बैठकें करें तथा अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार हो, उन्हें कविताओं, कहानियों, गतिविधियों और नई शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से पढ़ाया जाए, ताकि शिक्षा उनके जीवन का स्थायी हिस्सा बन सके। अंत में उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने की अपील की।