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बदला सिर्फ नाम, न स्टाफ और न दवा का इंतजाम

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- देवबंद क्षेत्र के गांव खेड़ी आस्सा में स्वास्थ्य उपकेंद्र - फोटो : SAHARANPUR
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बदला सिर्फ नाम, न स्टाफ और न दवा का इंतजाम
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सहारनपुर। पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र कहलाते थे, अब नाम हो गया है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर। इनके भवनों की रंगाई-पुताई और साफ-सफाई कराई गई। अच्छी सुविधाओं का दावा किया गया, लेकिन इन सेंटरों पर न दवा है और न पर्याप्त स्टाफ। मरीजों को उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही जाना पड़ रहा है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि सिर्फ नाम बदला है, सुविधाएं नहीं। पेश है जिले में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की स्थिति पर रिपोर्ट...
पहले चरण में 61 सेंटर स्थापित किए गए
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने के लिए वर्ष 2019 में आदेश आया था। जनपद में पहले चरण के तहत 61 सेंटर स्थापित किए गए। वर्तमान में 56 सेंटर चालू अवस्था में बताए जा रहे हैं। एएनएम सेंटर और दूरस्थ स्वास्थ्य उपकेंद्रों को उच्चीकृत कर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाया गया। सेंटर पर सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की नियुक्ति होनी है। सीएचओ की नियुक्ति से पहले जिला स्तर पर ट्रेनिंग कराई जाती है, जिसमें अभी कुछ सेंटरों के सीएचओ की ट्रेनिंग चल रही है।
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सिर्फ रंगाई पुताई चल रही
बेहट। ब्लॉक साढ़ौली कदीम में आठ स्वास्थ्य उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बदला गया। इनमें सलेमपुर गदा, मढ़ती, मायापुर रूपपुर, जाटोवाला, बेलका माफी, बड़कलां, चको व रसूलपुर आदि उप केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक सेंटर पर सीएचओ की तैनाती होनी थी, जो अभी तक नहीं हो पाई। केवल रंगाई पुताई का कार्य चल रहा है। यहां दवा उपलब्ध नहीं है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि वेलनेस सेंटर शुरू होने में समय लग सकता है।
देवबंद में खुले 11 सेंटर, दवा किसी पर नहीं
देवबंद। आयुष्मान भारत के अंतर्गत देवबंद ब्लाक में मार्च माह में 11 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए थे। जिनमें से अभी तक 9 सेंटरों पर ही स्टाफ की तैनाती हो पाई है। दवा की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. इंद्राज सिंह ने बताया कि साखन कलां व फतेहपुर को छोड़कर गुनारसा, खेडी आसा, मिरगपुर, बास्तम, बाबूपुर, अंबहेटा शेखां, जखवाला, लखनौती और थामना में खोले गए हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर ही सीएचओ तैनात हैं। इन सेंटरों पर स्टाफ नर्स को छह माह की स्पेशल ट्रेनिंग के बाद तैनात किया गया। सेंटर पर अभी दवा उपलब्ध नहीं हो सकी, क्योंकि विभाग की तरफ से दवा की सप्लाई नहीं हो पाई। सीएचओ सिर्फ बीपी व शुगर जैसी बीमारियों के मरीज देखते हैं। आगामी कुछ महीनों में और कुछ गांवों में सेंटर खोले जाने हैं, क्योंकि यहां से 21 सेंटरों की सूची भेजी गई थी।
गंगोह में खुले पांच सेंटर, स्टाफ की कमी
गंगोह। आयुष्मान भारत के अंतर्गत गंगोह सीएचसी क्षेत्र में पांच सेंटर खोले गए हैं। जिनमें एएनएम की तैनाती हो पाई है। स्टाफ और सुविधाओं का टोटा होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. रोहित वालिया ने बताया कि तबर्रकपुर, खैरसाल, खडलाना और लखनौती में खोले गए सेंटरों पर अभी तक एएनएम ही तैनात हैं। पूर्ण स्टाफ और दवा उपलब्ध नहीं हो सकी, क्योंकि विभाग की तरफ से दवाओं की सप्लाई नहीं हो पाई।
नकुड़ क्षेत्र में चार सेंटर बनाए गए
नकुड़। सीएचसी के अंतर्गत आने वाले चार उप स्वास्थ्य केंद्रों को हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाया गया है। सीएचसी प्रभारी डा. अमन गोपाल ने बताया कि गांव कपूरी, ढकदेई, झबीरण व धौराला में बनाये गए सेंटर पर एक-एक चिकित्सक तैनात है। अन्य प्राथमिक सुविधा भी उपलब्ध है।
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पहले चरण में 61 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बने, 90 का आदेश आया था। स्टाफ की ट्रेनिंग चल रही है। जीएनएम करने वालों को छह माह की ट्रेनिंग के बाद परीक्षा पास करनी होती है, जिसके बाद उनको हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सीएचओ बनाकर भेजा जाता है।
- डॉ. दयालशरण, नोडल अधिकारी/ एडिशनल सीएमओ

- गंगोह क्षेत्र के लखनौती में स्वास्थ्य उपकेंद्र।- फोटो : SAHARANPUR

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