-- एटीएस ने दो साल पहले पकड़ा था, दूसरे देशों के लोगों से संपर्क में थे
- लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने सुनाई बांग्लादेश निवासी दोनों को चार-चार साल की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। फर्जी दस्तावेज के जरिए अवैध रुप से यहां रहने वाले बाग्लादेश के निवासी जिन दो भाइयों मोहम्मद इकबाल और मोहम्मद फारुख को लखनऊ की विशेष न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चार साल के कारावास की सजा सुनाई है, उन्हें दो साल पहले एटीएस ने सहारनपुर से पकड़ा था, जो पांच साल से सहारनपुर में रह रहे थे।
वर्ष 2020 में एटीएस लखनऊ की टीम ने एक सूचना पर थाना कुतुबशेर क्षेत्र की कमेला कॉलोनी में अवैध रूप से चोरी छिपे रह रहे दो बांग्लादेश के दोनों भाइयों मोहम्मद इकबाल, मोहम्मद फारुख पुत्रगण नूर मोहम्मद को गिरफ्तार किया था, जो मूल रूप से बांग्लादेश के जिला चटगांव के सठकनिया थाना के गांव सादाह मोनूपारा के रहने वाले हैं। इनके पास से फर्जी पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड आदि भी बरामद हुए थे। इनके अमेरिका, म्यांमार, इटली, ब्रिटेन, सऊदी अरब के लोगों से भी संपर्क उजागर हुए थे। गत 30 मार्च को लखनऊ कोर्ट में इन पर दोष सिद्ध हो जाने पर चार-चार साल के कारावास और 6500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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पहले भी दो साल की सजा काट चुके हैं
सहारनपुर। एटीएस के अनुसार मोहम्मद इकबाल और मोहम्मद फारुख को पहले भी कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी। वह सन 2007 से भारत के पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रहते हुए 2013 में भी गिरफ्तार हुए थे। कोर्ट ने उन्हे दो साल की सजा सुनाई थी। सजा काटने के बाद उन्हें बांग्लादेश भेजा गया था। मगर इसके बाद भी दोनों दोबारा 2015 में फिर सीमा पार कर भारत में आए। वो यहां सहारनपुर की कमेला कॉलोनी में आकर नाम व पहचान बदल कर रहे थे।