ग्राम इस्सरपुर में बना बायो सीएनजी प्लांट
सहारनपुर। जनपद में जल्द ही फसल अवशेष से बायो सीएनजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) और जैविक खाद बनना शुरू हो जाएगा। इसके लिए ग्राम इस्सापुर में इकाई बनकर तैयार हो गई है। इसके इसी माह संचालित होने की उम्मीद है। इसमें प्रतिदिन छह टन बायो सीएनजी और 25 टन जैविक खाद तैयार होग। इकाई का 130 एकड़ में नेपियर घास उत्पादन के लिए किसानों से अनुबंध भी हो चुका है।
जिले में फसल अवशेष, नेपियर घास, गोबर और चीनी मिलों की मैली से बायो सीएनजी और जैविक खाद बनाने की इकाई जल्द ही शुरू हो जाएगी। इससे न सिर्फ फसल अवशेष को जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगेगा, बल्कि फसल अवशेष इस इकाई को बेचकर किसान अतिरिक्त आय भी ले सकेंगे। विकासखंड गंगोह के ग्राम इस्सापुर में करीब 36 करोड़ रुपये की लागत वाली इस इकाई के लिए लखनऊ में हुए निवेशक सम्मेलन में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे।
इस इकाई में तैयार होने वाली बायो सीएनजी को किसान गैस और जैविक खाद को किसान कंपोस्ट के नाम से बेचा जाएगा। इस इकाई में उत्पादित बायो सीएनजी को दो सरकारी गैस कंपनी को बेचने के साथ ही अपना सीएनजी पंप भी स्थापित किया जाएगा। जैविक खाद किसानों को बेचा जाएगा। यह खाद न सिर्फ उर्वरकों से सस्ती होगी, बल्कि मृदा का स्वास्थ्य सुधारने में भी सहायक रहेगी।
- किसानों से किया 130 एकड़ नेपियर घास के लिए अनुबंध
सेवाजोन एनर्जी एंड फर्टीलाइजर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित राणा एवं जैविल राणा ने बताया कि इस इकाई में फसल अवशेष के साथ ही नेपियर घास का प्रयोग भी कियाजाएगा। इसके लिए क्षेत्र के किसानों से 130 एकड़ में नेपियर घास उत्पादित करने का अनुबंध किया है। फर्म नेपियर घास को स्वयं खेत से कटवाएगी। इसलिए ब्राजील से एक मशीन का आयात किया जा रहा है। इससे किसानों के सामने श्रमिकों की समस्या भी नहीं आएगी। किसानों से यह घास 1200 रुपये प्रति टन मूल्य पर खरीदी जाएगी।
- वर्जन
ग्राम इस्सापुर में फसल अवशेष से बायो सीएनजी और जैविक खाद तैयार करने वाली इकाई लगभग तैयार हो गई है। इसके इसी माह चलने की उम्मीद है। - वीके कौशल, उपायुक्त उद्योग।