सवारियों का टोटा, छुटमलपुर डिपो को रोज छह लाख का नुकसान
छुटमलपुर। अनलॉक वन में उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें तो दौड़नी शुरू हो गईं लेकिन सवारियों के अभाव में इनका संचालन निगम के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। बस संचालन में छुटमलपुर डिपो को पहले सात दिन में ही 45 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। जबकि यह डिपो आय के मामले में लॉकडाउन से पहले पूरे प्रदेश में टॉप टेन में शामिल था।
उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के छुटमलपुर डिपो में 67 बसों का बेड़ा है। इंटर स्टेट बसें चलाने की बाध्यता के चलते डिपो के शिमला, पीलीभीत, देहरादून, हरिद्वार, करनाल, कुरुक्षेत्र, दिल्ली आदि महत्वपूर्ण रूट बंद हैं। इसके चलते केवल 35 बसों का ही संचालन प्रतिदिन हो रहा है। इन बसों में भी सवारियों का टोटा है। सामान्य दिनों में 70 फीसदी लोड फैक्टर देने वाली बसें 20 से 22 फीसदी लोड फैक्टर ही दे पा रही हैं। इसी का नतीजा है कि आठ लाख रुपये राजस्व इकट्ठा करने वाले डिपो का शनिवार को राजस्व केवल 1.61 लाख था। चालक-परिचालक का वेतन तो दूर, डीजल और मरम्मत का खर्च भी नहीं निकल रहा है।
गत फरवरी माह में डिपो छठे स्थान पर था। कोरोना संक्रमण के चलते सैनिटाइजेशन का खर्च और डिपो पर बढ़ गया है। वरिष्ठ केंद्र प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि तीन से चार हजार रुपये प्रतिदिन सैनिटाइजेशन पर खर्च हो रहे हैं। छुटमलपुर डिपो बार्डर पर स्थित है। दूसरे राज्यों में बसों के संचालन की अनुमति नहीं है। इसके चलते बड़े और महत्वपूर्ण रूट बंद पड़े हैं। केवल सहारनपुर की तरफ ही सारी बसें भेजनी पड़ रही हैं।
वर्जन
सवारियां न मिलने के कारण प्रतिदिन औसतन छह लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। पहले सप्ताह में ही छुटमलपुर डिपो से निगम को 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। दूसरे राज्यों के रूट खुलने के बाद ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
- प्रेम सिंह, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम
संविदाकर्मी चालक-परिचालकों पर भी पड़ी मार
डिपो में करीब 250 चालक-परिचालक संविदा पर तैनात हैं। आधी बसें चलने के कारण इन्हें भी रोज ड्यूटी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सामान्य दिनों में 12 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले ये चालक-परिचालक भी अब पांच से छह हजार रुपये ही पा सकेंगे। संविदा कर्मचारी यूनियन के शाखा मंत्री अस्तपाल सिंह कहते हैं कि ऐसी स्थिति में उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ रही है। निगम प्रशासन उन्हें निर्धारित 15 हजार रुपये प्रति माह वेतन दे।