सहारनपुर। कृषि विभाग बासमती चावल के निर्यात पर फोकस कर रहा है। इसके लिए जनपद में कार्यरत एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) को 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्यात योग्य बासमती धान की खेती कराने का लक्ष्य दिया है। निर्यात योग्य बासमती धान की खेती एफपीओ कराएंगे। 50 हेक्टेयर का यह कलस्टर तीन से चार गांवों में मिलाकर बनाए जा सकते हैं। उत्पादन की 30 फीसदी बासमती का निर्यात करने पर कलस्टर में शामिल किसानों को पांच वर्षों में दस लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
विश्व के कई देशों में भारतीय बासमती को खासा पसंद किया जाता है। इसके चलते कृषि विभाग बासमती चावल के निर्यात पर जोर दे रहा है। जिससे न सिर्फ किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिल सके बल्कि देश को भी विदेशी मुद्रा प्राप्त हो सके। इसके लिए एफपीओ को न्यूनतम 50 हेक्टेयर के एक कलस्टर में बासमती धान की खेेती करने का लक्ष्य दिया है। इसमें एफपीओ अपने से जुडे़ किसानों के माध्यम से कलस्टर बनाएंगे। कलस्टर के बनाने, पंजीकरण कराने और कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत निर्यात करने के बाद उन्हें पांच वर्षों में कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग की ओर से दस लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 50 हेक्टेयर से अधिक का कलस्टर होने पर छह लाख रुपये तक की राशि और बढ़ सकती है। प्रोत्साहन राशि प्रथम वर्ष में 40 फीसदी और 15 प्रतिशत आगामी चार वर्षों तक दी जाएगी। एफपीओ को जल्द ही किसानों का चयन करने के लिए कहा गया है।
विदेशों में इन प्रजातियों की विशेष मांग
देश से बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात होता है। इसमें बासमती की खासी मांग रहती है। इसे देखते हुए कृषि विभाग निर्यात के लिए कई प्रजातियों की खेती को प्राथमिकता देगा। इनमें पूसा बासमती -01, पूसा बासमती- 1509 और पूसा बासमती 1121 प्रजातियां शामिल हैं।
वर्जन
जनपद में 18 कृषक उत्पादन संगठन हैं। इन सभी को पत्र भेजकर निर्यात योग्य बासमती धान की खेती के लिए कलस्टर बनाने के लिए पत्र भेजा है। इसमें 50 हेक्टेयर का एक कलस्टर बनाया जाएगा। जो भी एफपीओ इसके लिए तैयार होगा उसे इस योजना में शामिल किया जाएगा। इसमें कलस्टर तीन से चार गांवों के किसानों को मिलाकर भी बनाया जा सकता है।-डॉ. राकेश मौर्य, उप निदेशक कृषि