सहारनपुर। पद्म विभूषण एवं अनेक पुरस्कारों से सम्मानित चिपको आंदोलन के प्रणेता पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का सहारनपुर से निकट का नाता रहा। अक्सर पद्मश्री कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर से उनकी मुलाकात होती थी और चिपको आंदोलन सहित तमाम मुद्दों पर चर्चा करते थे। यही नहीं, सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा ने जब उत्तराखंड में शराब की अवैध बिक्री के खिलाफ सत्याग्रह किया तो वहां से गिरफ्तार महिलाओं को सहारनपुर जेल में ही रखा गया था।
यह बातें पद्मश्री कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर के पुत्र अखिलेश प्रभाकर ने बताईं। उन्होंने बताया कि पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा अक्सर सहारनपुर आते थे। एक बार जब सुंदरलाल बहुगुणा ने 24 दिन की भूख हड़ताल की थी, तब उनके पिता कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ने उनसे वहां जाकर मुलाकात की थी, तब बहुगुणा ने अपने सतत मौन के कारण डायरी में लिखकर ही संबोधित किया था। प्रभाकर जी आप बसंत पंचमी के दिन मेरे जीवन के लिए नया बसंत लेकर आए है। वृक्ष हैं मेरे जीवन प्राण, यही हमारी संस्कृति का संदेश है। भौतिक सभ्यता के आक्रमण ने मनुष्य को धरती से जुदा कर दिया है। हमारा प्रयास उसे धरती के साथ मां का व्यवहार करने वाला बनाने का होना चाहिए जो उसका स्वाभाविक रिश्ता है और यह तभी हो सकता है जब उसे धरती से सीधा पोषण पाने का अवसर मिले। अखिलेश प्रभाकर ने बताया कि उत्तराखंड में सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तार महिलाओं को सहारनपुर की जिला जेल में ही रखा गया था। उस समय भी उनके पिता कन्हैयालाल मिश्र ने जेल प्रशासन से संपर्क करके इन सत्याग्रही बहनों की चिकित्सा एवं अन्य साधनों सुविधाओं की व्यवस्था की थी।