इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के बयान के बाद वहां मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में जेल में बंद क्षेत्र के गांव शीतलपुर निवासी गुरदीप के परिजनों की आस टूटती दिखाई दे रही है। वह तो गुरदीप के सकुशल वापस लौटने की राह देख रहे थे। अब इस बयान के बाद उनमें फिर से कोहराम मच गया है। परिजन विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाने के लिए दिल्ली जा चुके हैं।
गंगोह क्षेत्र के गांव शीतलपुर निवासी गुरदीप सिंह 2002 में परिवार सहित न्यूजीलैंड जाने के लिए घर से निकला था। वह मानव तस्करों के जाल में फंसकर इंडोनेशिया पहुंच गया था। वहां 29 अगस्त 2004 को सुकर्णो हत्ता हवाई अड्डे पर इंडोनेशिया, नाईजीरिया, जिंबावे और पाकिस्तान के 14 लोगों सहित मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में पुलिस ने पकड़ कर उसे जेल भेज दिया था।
फरवरी 2005 में तांगेराम अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ बानतेल हाईकोर्ट में की गई अपील खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। वहां भी उसकी सजा को बरकरार रखा गया।
26 जुलाई को परिजनों को पता चला कि तीन दिन के अंदर गुरदीप को शूट कर दिया जाएगा। इस पर उन्होंने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई और 28 जुलाई की रात केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हस्तक्षेप के चलते शूट किए जाने से महज पांच मिनट पूर्व उसकी मौत की सजा को स्थगित कर दिया गया। इसके बाद गुरदीप के पिता ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से उसके कानूनी प्रतिनिधि अफजाल मोहम्मद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अर्जी दाखिल की।
भारतीय दूतावास द्वारा भी इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय को एक नोट वर्बेल भेजा गया जिसमें मौत की सजा से पूर्व सभी कानूनी उपाय अपनाने का आग्रह किया गया था। अब वहां के राष्ट्रपति जोको विडोडो के जारी बयान ने उनकी नींद उड़ा दी है।
गुरदीप के भाई गुरप्रीत ने बताया कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। वह और गुरदीप की पत्नी एवं बच्चे विदेश मंत्रालय के माध्यम से उनसे मिलने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनसे मिलकर गुरदीप की रिहाई की गुहार लगा सकें।
गुरदीप सिंह के पिता गुरदेव सिंह और माता हरजिंदर कौर का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी आंखों से आंसू नही रुक रहे। हरजिंदर कौर ने बताया कि 14 साल पूर्व उनका बेटा बेहतर रोजगार और परिवार की खुशहाली का सपना लेकर विदेश गया था। उसकी मां ने कहा कि उन्हें यकीन है कि उनका बेटा सकुशल वापस लौटेगा। उनको सरकार पर भरोसा है कि वह उसके बेटे को मरने नही देगी और वापस लाएगी। एक बार फिर से गुरदीप के सिर पर मौत की तलवार लटकती देख परिजनों की भूख-प्यास उड़ गई है। सोमवार को गांव में उसके पर घर चूल्हा तक नहीं जला।