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Saharanpur News: बनाना था ओवरहेड टैंक बना दिया अंडरग्राउंड, शासन सख्त

Thu, 13 Aug 2026 01:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में बड़ी लापरवाही सामने आई है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जो योजनाएं बनाई गई थीं, उसी में कार्यदायी संस्था ने अपनी सुविधा के हिसाब से निर्माण कर दिया। कार्यदायी संस्था ने ओवरहेड टैंक की जगह अंडरग्राउंड टैंक और एक हजार केएलडी क्षमता वाले एसटीपी की जगह 156 केएलडी का एसटीपी बना दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की आपत्ति के बाद शासन में शिकायत पहुंची, जिस पर शासन ने तीन माह में सुधार के निर्देश दिए हैं।
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विश्वविद्यालय के कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। विश्वविद्यालय परिसर से निकलने वाले दूषित पानी को साफ कर ढमोला नदी में छोड़ने के लिए एक हजार केएलडी (किलोलीटर प्रति दिन) यानी दस लाख लीटर पानी को साफ करने की क्षमता का एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित किया जाना था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने एक हजार की बजाय मात्र 156 केएलडी का एसटीपी बनाकर खड़ा कर दिया है, जो नाकाफी है, क्योंकि भविष्य में विश्वविद्यालय परिसर में प्रोफेसरों और कर्मचारियों के आवास भी बनेंगे। इसके अलावा छात्रावासों के शौचालय, स्नानघरों और रसोई आदि से भारी मात्रा में दूषित पानी निकलेगा।
भविष्य को देखते हुए ही योजना में एक हजार केएलडी के एसटीपी को लिया गया था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने मात्र 156 केएलडी का एसटीपी बना दिया गया, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपत्ति जताई है। कार्यदायी संस्था की दूसरी बड़ी लापरवाही ओवरहेड टैंक को लेकर सामने आई है। पूरे परिसर में पेयजल आपूर्ति के लिए ओवरहेड टैंक बनाया जाना था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने यूजी (अंडरग्राउंड) टैंक बनाकर दिया है। यानी योजना कुछ और, जमीन पर निर्माण कुछ और। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इस पर भी आपत्ति जताई गई है
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उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता महिपाल सिंह ने बताया कि योजना में 156 केएलडी का ही एसटीपी बनना था, जो बाद में संशोधित होकर एक हजार केएलडी का हुआ है। इसके अलावा ओवरहेड टैंक को लेकर भी प्रक्रिया चल रही है।

97 करोड़ खर्च के बाद भी इंजीनियरिंग पर सवाल
पहले चरण में विश्वविद्यालय में 97.02 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराए गए हैं, जिनमें प्रशासनिक भवन, अनेक विभागों के भवन, कुलपति आवास सहित अनेक भवन शामिल हैं। पहले ही कार्यदायी संस्था की खराब इंजीनियरिंग के कारण विश्वविद्यालय जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। अब कुछ निर्माण कार्यों में योजना के विपरीत काम किया जाना सामने आया है। यह लापरवाही है या फिर मनमानी यह जांच के बाद ही पता चलेगा।
विश्वविद्यालय में पेयजल आपूर्ति के लिए ओवरहेड टैंक बनाया जाना था, जिसकी जगह यूजी टैंक बना दिया गया है। इसी प्रकार एक हजार केएलडी क्षमता के एसटीपी की जगह मात्र 156 केएलडी का एसटीपी बनाया गया है। इस संबंध में शासन को अवगत कराया गया था, जिसके बाद शासन ने कार्यदायी संस्था का तीन माह में सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
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- कमल कृष्ण, कुलसचिव, मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय
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