सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि शराब पीने या पिलाने, मां-बाप की बात न मानने, रिश्तेदारों से नाता तोड़ने वाले लोगों की अल्लाह दुआ कुबूल नहीं करते हैं। इसीलिए हर गुनाह से अल्लाह की बारगाह में दुआ करें और हर गलत कार्यों को छोड़ने के एहद लें। क्योंकि, गलत कार्यों को हमेशा के लिए छोड़ देने का नाम भी रमजान है।
सवाल-मल्हीपुर निवासी मुनीर ने पूछा कि कोई व्यक्ति रोजे रखता है, लेकिन नमाज नहीं पढ़ता। ऐसी सूरत में क्या रोजा हो जाएगा।
जवाब--नमाज और रोजा अलग-अलग फर्ज इबादत है। यदि कोई व्यक्ति रोजा रखता है और नमाज नहीं पढ़ता। इस तरह रोजा तो हो जाएगा, लेकिन उसके रोजे का सवाब अल्लाह के यहां मिलेगा। रोजे के साथ नमाज भी पढ़नी चाहिए, जो नहीं पढ़ते गुनहगार होते हैं।
सवाल-- यमुनागर निवासी बिलाल ने पूछा उनकी छाती पर मवाद वाला फोड़ा हो रहा था। रोजे की हालत में अचानक फूट गया, जिससे काफी पस और खून बह रहा है। ऐसी सूरत में मेरा रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब- आपका रोजा सलामत है। शरीयत के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के रोजे की हालत में जिस्म पर हुए फोड़ा या फुंसी फूट जाए तो इससे रोजा नहीं टूटता है।