सहारनपुर। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नजर दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी के बाद के बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर रहती है। वहीं, पारंपरिक होलिका दहन से भी वायु प्रदूषण बढ़ता है। जनपद में वायु गुणवत्ता सू्चकांक (एक्यूआई) होली के दिन तक 140 था। वह होलिका दहन के बाद 250 तक पहुंच गया। केवल सहारनपुर ही नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई जिलों में प्रदूषण की स्थिति इससे भी खराब रही।
होली के दिन यानी 17 मार्च को जनपद में एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडैक्स) 140 था। शाम को महानगर के साथ ही जिले भर में 1528 जगह पर होलिका दहन हुआ। जिसके दहन का मुहूर्त शाम 06:28 से रात 09:15 बजे तक था। जिले भर में तीन घंटे के भीतर एक साथ होलिका दहन से वायु में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया। होली से अगले दिन यानी दुल्हैंडी पर वायु प्रदूषण बढ़ा हुआ नजर आया। सहारनपुर में इसका स्तर 250 एक्यूआई रहा, जबकि पड़ोसी जनपद मुजफ्फरनगर में 302 और दूसरे पड़ोसी जनपद यमुनानगर में 337 दर्ज किया गया। शुक्रवार को देश के मात्र 12 महानगरों का एक्यूआई 300 के पार रहा, जबकि दिल्ली जैसी जगह पर एक्यूआई 286 दर्ज किया गया। यहां अक्सर सबसे अधिक वायु प्रदूषण रहता है। जिन महानगरों में एक्यूआई 300 के पार रहा है। उनमें अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, घरौंडा, बड़ौत, रोहतक, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, पटना, मुजफ्फरपुर आदि शामिल हैं। जबकि देश के शेष महानगरों में एक्यूआई 300 से नीचे रहा है।
एक्यूआई और उसकी स्थितियां
एक्यूआई स्थिति
0-50 बेहतर
51-100 संतोषजनक
101-200 सामान्य
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
चांद का रंग रहा लाल
दुल्हैंडी की रात जिस समय चांद निकला तो उसका रंग लाल था। इसकी वजह वायु में प्रदूषण माना जा रहा है। यह पृथ्वी के ऊपर कुछ ऊंचाई तक था। हालाकि मध्य रात्रि में चांद सामान्य रंग का दिखा। इसी तरह शुक्रवार शाम आसमान में धुआं देखा गया। शाम के समय सूरज छिपने के दौरान वायु में प्रदूषण को स्पष्ट देखा जा सकता था।
होली के दिन से एक सप्ताह पहले तक का एक्यूआई देखा जाए तो 130 और 140 के आसपास चल रहा था, लेकिन होलिका दहन के बाद रात में और शुक्रवार को प्रदूषण अचानक से बढ़ा है। अच्छी बात यह है कि शनिवार को एक्यूआई फिर कम हुआ है। मात्र एक दिन यानी 24 घंटे के लिए प्रदूषण बढ़ने की वजह होलिका दहन हो सकता है।-डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड