इंडोनेशिया में गुरदीप का जन्मदिन मनाते परिवार के लोग
- फोटो : SAHARANPUR
गंगोह (सहारनपुर)। इंडोनेशिया की जेल में बंद क्षेत्र के गांव शीतलपुर निवासी गुरदीप सिंह की मां और परिजनों ने जैसे ही 17 साल बाद जिगर के टुकड़े को अपने गले से लगाया, आंखों से झरझर आंसू बहने लगे। वह अपने उस बेटे को गले लगा रहे थे, जिसके आंखों के सामने चार कैदियों को गोली मार दी गई थी और पांचवां नंबर गुरदीप का था। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हस्तक्षेप और कागजी कार्यवाही के बाद गुरदीप की सजा को स्थगित कर दी गई। अब परिजनों को आस बंधी है कि अगले बरस उसे रिहा कर वतन की धरती नसीब होगी। परिजन एक माह के अराइवल वीजा पर इंडोनेशिया गए हैं।
बताते चलें कि गंगोह क्षेत्र के गांव शीतलपुर निवासी गुरदीप सिंह 2002 में परिवार सहित न्यूजीलैंड जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वह तस्करों के जाल में फंसकर इंडोनेशिया पहुंच गए। वहां वह काफी दिनों तक मेहनत मजदूरी करता रहा। इस बीच उसने किसी तरह से अपने परिवार को भारत भेज दिया। 29 अगस्त 2004 को सुकर्णो हत्ता हवाई अड्डे पर इंडोनेशिया, नाइजीरिया, जिंबाब्वे और पाकिस्तान के 14 लोगों को मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में जेल भेज दिया था। फरवरी 2005 में तांगेराम अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ बानतेल हाईकोर्ट में की गई अपील खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। परंतु वहां भी सजा को बरकरार रखा गया। मामला चलता रहा। 26 जुलाई 2016 को परिजनों को पता चला कि तीन दिन के भीतर गुरदीप को शूट कर दिया जाएगा। बेचैन परिजनों ने 2016 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद की गुहार लगाई। उस वक्त 28 जुलाई की रात सभी 14 कैदियों को शूट करने के लिए एक लाइन में खड़ा कर दिया गया था। चार कैदियों को गोली मार दी गई थी और पांचवां नंबर गुरदीप का था कि तभी पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने तेजी से एक्शन लेते हुए पूरे प्रकरण में हस्तक्षेप करते हुए सजा को स्थगित करवाया। इसके बाद गुरदीप के पिता ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से उसके कानूनी प्रतिनिधि अफजाल मोहम्मद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अर्जी दाखिल की। भारतीय दूतावास की ओर से भी इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय को एक नोट वर्बेल भेजा गया जिसमें मौत की सजा से पूर्व सभी कानूनी उपाय अपनाने का आग्रह किया गया था। फिलहाल गुरदीप उसी जेल में बंद हैं। बीते 17 सितंबर को उनकी माता हरजिंदर कौर, पत्नी कुलदीप कौर और बेटी मनजीत कौर एक माह के अराइवल वीजा पर इंडोनेशिया पहुंचे। वहां सोमवार और मंगलवार को उनकी गुरदीप से दो-दो घंटे की मुलाकात हुई। गुरदीप को सही सलामत सामने देख सभी भाव विभोर हो गए। गुरदीप ने शूट किए जाने वाली रात का मंजर बयान किया तो कलेजा बाहर को परिजनों का ये सुनकर निकल आया। गुरदीप के भाई गुरप्रीत ने बताया कि परिजन वहां एक माह में अभी छह मुलाकात और करेंगे। गुरदीप के वकील से मिलकर केस की स्थिति की जानकारी भी ली जाएगी। उन्होंने आशा जताई की शायद अगले वर्ष सरकार गुरदीप को रिहा करा सकती है।
गुरदीप की दूसरी पत्नी कर रही केस की पैरवी
गंगोह। गुरदीप सिंह ने इंडोनेशिया में एक महिला से दूसरी शादी कर ली थी। उनके दो बेटियां भी हैं। उसके भाई गुरप्रीत सिंह ने बताया कि इंडोनेशिया में वही गुरदीप के केस में पैरवी भी कर रही है।
इंडोनेशिया में बंद गुरदीप का फोटो दिखाती मां- फोटो : SAHARANPUR
इंडोनेशिया में गुरदीप का जन्मदिन मनाते परिजन- फोटो : SAHARANPUR
इंडो नेशिया में गुरदीप से मुलाकात करता परिवार- फोटो : SAHARANPUR