संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जल कल विभाग में लीकेज की टेंडर प्रक्रिया पर फिर सवाल उठ रहे हैं। पार्षदों ने मंडलायुक्त लोकेश एम. और नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह को ज्ञापन देकर आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप लगाया कि कुछ खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्त बदल दी गई है, जिससे निगम को वित्तीय हानि होगी।
पार्षदों को साथ लेकर बुधवार को मंडलायुक्त और नगरायुक्त से मिले पार्षद मंसूर बदर ने दोनों अधिकारियों को बताया कि ढाई वर्ष से लीकेज टेंडर के नाम पर खेल हो रहा है। एक दर पर ढाई साल से 11 ठेकेदारों को लाभ देने के लिए टेंडर नहीं किया गया। अभी तक एक भी लीकेज का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। एक वर्ष में लीकेज ठीक करने के नाम पर 10 से 12 करोड़ रुपये का भुगतान ठेेकेदारों को किया जा रहा है। पूर्व में जब इसकी शिकायत मंडलायुक्त से की गई तो 30 दिसंबर 2021 को महाप्रबंधक ने एक वर्ष के लिए अनुमानित लागत दो करोड़ का टेंडर निकलवाया था, लेकिन आचार संहिता की वजह से टेंडर नहीं हो सका था। 21 अप्रैल 2022 को दोबारा निकाला गया। इसमें तीन टेंडर आए और इसकी एक वर्ष की अनुमानित लागत दो करोड़ रखी गई। टेक्निकल बिड खोलने के बाद इन टेडरों की फाइनेंशियल बिड नहीं खोली गई, क्योंकि यह टेंडर दो करोड़ का था, जबकि पूर्व में प्रति वर्ष 10 से 12 करोड़ रुपये का भुगतान हो रहा था। 11 मई 2022 को तीसरी बार इस टेंडर को निकाला गया, जो कि पुरानी पत्रावली से ही निकाला गया, लेकिन पूर्व के टेंडर जो 30 दिसंबर 2021 और 21 अप्रैल 2022 की शर्त नंबर तीन में संशोधन कर दिया गया। इसमें एक वर्ष का अंकन 20 लाख रुपये का अनुभव प्रमाण पत्र मांगा गया था, जिसे बदलकर 25 लाख रुपये का कर दिया गया। सवाल यह है कि जब टेंडर दो बार हो चुका है तो तीसरी बार उसकी शर्त क्यों बदल दी गई। मंसूर का आरोप है कि अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए शर्त में बदलाव किया गया है। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग मंडलायुक्त और नगरायुक्त से की है। मिलने वालों में पार्षद पार्षद शहजाद मलिक, पार्षद डॉ. अहसान, पार्षद प्रतिनिधि सईद सिद्दीकी शामिल रहे।